Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जनवरी 9, 2014

बादलों की आँखें


 

अनिता ललित

1

गरजे मेघ,

सूरज भागा, छिपा

दूसरे देश।

2

चीखे बादल,

थर-थर काँपती

भोर है आई।

3

धरा है भीगी,

बादलों की आँखें भी

हुई हैं गीली। 

4

मन  है रोया

ग़रीबी की आड़ में

मानव खोया।

 5

देखो ठिठुरी

ग़रीब की झोंपड़ी

जमी, पिघली।

-0-

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Responses

  1. प्रकृति और मानव की वृति से जुड़े आप के सभी बहुत अच्‍छे लगे ।अनिताजी आप को
    हार्दिक बधाई।

  2. सभी हाइकु बहुत सुन्दर हैं ..

    धरा है भीगी,
    बादलों की आँखें भी
    हुई हैं गीली। ……..परदुखकातर ..प्रकृति ….बहुत सुन्दर !..बधाई अनिता जी .

  3. सर्दी के उत्कृष्ट हाइकु
    बधाई

  4. sardi ke sabhi haiku bahut achhe likhe hain anita ji apko bahut badhai
    pushpa mehra.

  5. सीमा स्मृति जी, ज्योत्स्ना शर्मा जी, मंजू गुप्ता जी, पुष्प मेहरा जी… हाइकु पसंद करने के लिए आप सभी का ह्रदय से आभार !:)
    ~सादर
    अनिता ललित

  6. NAMSKAR JI
    ANITA JI LALIT
    KHOOB BADHAI .

  7. धरा है भीगी,
    बादलों की आँखें भी
    हुई हैं गीली।

    बहुत सुन्दर….बधाई अनिता जी !

  8. अच्छे हाइकु हैं अनिता जी। बधाई !

  9. धरा है भीगी,
    बादलों की आँखें भी
    हुई हैं गीली।

    वाह…शरद का वर्णन करते सभी हाइकु सुन्दर…बधाई अनीता जी !!

  10. sabhi haiku utkrisht hai anita ji ,,,,,,,,,,badhi ke saath nav varsh ki shubh kaamnaye

  11. बहुत मर्मस्पर्शी हाइकू…बधाई…|


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