Posted by: हरदीप कौर संधु | नवम्बर 26, 2013

जुगलबन्दी-हिमांशु-अनिता ललित


 

माटी की नाव- रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

जुगलबन्दी-अनिता ललित

  1

देखे न जाएँ                      – ‘हिमांशु’

अपनों के ये आँसू 

खूब रुलाएँ!

0

क्यों सहेजे तू                अनिता ललित

अपनों की आँखों में

आँसू के मोती ?

2

बनके चाँद                         – ‘हिमांशु’

मेरी स्याह रातों में

करो उजाला!

0

न चाहूँ चाँद                             अनिता ललित

स्याह रात सुनाए

मेरी कहानी!

3

बाँधतीं नहीं                             – ‘हिमांशु’

कभी किसी पाश में

आवारा यादें!

0

यादों को बाँधा                        -अनिता ललित

दिल में मैंने एक

गाँव सजाया!

0

4. बुनते रहे                 ~~- ‘हिमांशु’

यादों की सलाई से

साँसों के छिन!

 

जब भी चले                           -अनिता ललित

याद-सलाई, उधेड़े

ज़ख़्मों के दिन!

5

 हँसके जिएँ,   — ‘हिमांशु’

जब झरें, क्यों डरें

रोज़ क्यों मरें?

0

जब भी हँसे                -अनिता ललित

क़िस्मत ने धोखे से

मार गिराया!

6

ठिठुरी धूप   ~~- ‘हिमांशु’

मुँडेर  चढ़ बैठी 

बच्ची सी ऐंठी !

0

अम्मा सी धूप       -अनिता ललित

हौले से नीचे उतरी

अँगना लेटी!

7

 खेलते खो-खो   ~~- ‘हिमांशु’

मेघ-शिशु अम्बर

शोर मचाएँ!

0

खेल-थक के               -अनिता ललित

ज्यों माँ से लिपटे, यों

मेघ हैं सोए!

 8

भीड़ में हम  ~~- ‘हिमांशु’

अनजाना शहर

हो गये तन्हा!

0

 

अकेले कहाँ?       -अनिता ललित

तेरी यादों के मेले

घेरे हैं सदा!

9

छूटे किनारे  ~~- ‘हिमांशु

तूफ़ानों में जो घिरी

जीवन-नैया!

0

भूले जो तट,        -अनिता ललित

लहरों ने सँभाला 

पार उतारा!

10

जाना न भूल               ~~- ‘हिमांशु’

अपनों के वेश में

चुभे थे शूल!

0

कैसे भूलेंगे                             -अनिता ललित

परायों ने प्रेम से

राह बुहारी!

  

-0-


Responses

  1. सभी बहुत खूबसूरत. बच्ची भी अम्मा भी… प्यारी सी धूप…

    ठिठुरी धूप ~~- ‘हिमांशु’
    मुँडेर चढ़ बैठी
    बच्ची सी ऐंठी !
    0
    अम्मा सी धूप -अनिता ललित
    हौले से नीचे उतरी
    अँगना लेटी!

    काम्बोज जी और अनिता जी को बधाई.

  2. बहुत सुंदर जुगालबंदी है….काम्बोज जी और अनीता जी को बधाई

  3. ठिठुरी धूप ~~- ‘हिमांशु’
    मुँडेर चढ़ बैठी
    बच्ची सी ऐंठी !

    अनिता जी का धूप को अम्मा का रूपक देना भी अच्छा लगा । इस सुंदर जुगलबंदी के लिए आप दोनों को बधाई !

  4. ye jugalbandi bahut majedar hai;

    kyunki,

    pyar ki doren
    bandhata janam-janam
    risten hamara.

  5. ठिठुरी धूप ~~- ‘हिमांशु’
    मुँडेर चढ़ बैठी
    बच्ची सी ऐंठी !
    0
    अम्मा सी धूप -अनिता ललित
    हौले से नीचे उतरी
    अँगना लेटी!

    बहुत बहुत ही मीठा हाइकु । जुगलबन्‍दी का बादशाह। कमाल है । हार्दिक बधाई।

  6. बहुत ही सुन्दर ….सरस …मोहक जुगलबंदी ..सभी प्रशंसनीय हैं लेकिन ..६,७ और १० बहुत अच्छे लगे …हार्दिक बधाई आ काम्बोज भाई जी एवं अनिता ललित जी !

  7. वाह एक के बाद एक हाइकु सभी मन को भा गए | भाई हिमांशु जी और अनीताजी को ढेर सारी बधाई |

  8. वाह क्या जुगलबंदी है । एक-एक हाइकु बहुत सरस ।
    हिमांशु जी, अनीता ललित जी बधाई ।

  9. जेन्नी जी, अनीता जी, सीमा जी, ज्योत्स्ना जी, कमला जी, कृष्णा जी … आप सभी साहित्यकारों का दिल से बहुत-बहुत आभार! हमारा ये प्रयास हिमांशु भैया जी तथा आप सभी को पसंद आया … इससे बड़ी ख़ुशी की बात और क्या हो सकती है हमारे लिए…! बहुत-बहुत धन्यवाद!!! 🙂

    ~सादर
    अनिता ललित

  10. जाना न भूल ~~- ‘हिमांशु’
    अपनों के वेश में
    चुभे थे शूल!
    0
    कैसे भूलेंगे -अनिता ललित
    परायों ने प्रेम से
    राह बुहारी!
    वाह बहुत सुंदर जुगालबंदी …..बधाई हिमांशु भैया और अनीता जी ….

  11. सुशीला जी, अनुपमा जी, rsmsumanam जी .. हार्दिक धन्यवाद!

    ~सादर
    अनिता ललित

  12. जुगलबंदी तो हमेशा ही दिल खुश कर देती है…उम्मीद से दुगुना देकर…और फिर जब सामने आदरणीय कम्बोज जी की सशक्त लेखनी से निकले हाइकु हो तो सोने में सुहागा…|
    बहुत आनंद आया…बधाई और आभार…|

  13. वाह…सुंदर जुगलबंदी

    छूटे किनारे ~~- ‘हिमांशु’
    तूफ़ानों में जो घिरी
    जीवन-नैया!
    0
    भूले जो तट, -अनिता ललित
    लहरों ने सँभाला
    पार उतारा!

    हिमांशु सर एवं अनीता जी को हार्दिक बधाई|

  14. kamboj bhai ji va anita ji ki jugalbandi bahut hi sunder hai. chute bahut kinare…., bhule jo tat…….bahut samvedanajanya jugalbandi hai.badhai.
    pushpa mehra.

  15. बेमिसाल जुगलबंदी भाईसाहब और अनीता जी !!!!! पढ़ के मज़ा ही आ गया 🙂

  16. ऋता जी, पुष्पा जी, ज्योत्स्ना जी … आप सभी का हृदय से आभार!:)

    सब हिमांशु भैया जी की लेखनी का कमाल है! उनके द्वारा रचित ‘माटी की नाव’ के हाइकु इतने सुंदर, भाव विह्वल कर देने वाले हैं… कि अनायास ही हमारे दिल में भी कुछ वैसे ही विचार आ गये…और जुगलबंदी हो गयी!
    आप सभी के प्रोत्साहन का बहुत-बहुत आभार 🙂

    ~सादर
    अनिता ललित

  17. waah … kya khoobsurat jugal bandi hai ….

    ठिठुरी धूप
    मुँडेर चढ़ बैठी
    बच्ची सी ऐंठी !

    behad sundar …. ye to bas meel pathar hai haiku jagat ka !

  18. वाह भाईसाहब , सभी हाइकु , एक से बढ़कर एक , आनंद आ गया क्या खूब जुगलबंदी हुई है , आपकी लेखनी को पढ़ना आनंदमयी अनुभूति है ,पर यह तो सोने पे सुहागा है ऐसे हाइकु यहीं पढ़ने मिल सकते है और अनीता जी ने खूब जुगलबंदी की है , मुझे सभी अच्छे लगे — हार्दिक बधाई आप दोनों को।


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

श्रेणी

%d bloggers like this: