Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | नवम्बर 24, 2013

सूखा आँगन


1-शशि पुरवार

1.
मृदा ही सींचे 
पल्लवित ये बीज
मेरा ही अंश। 

2.
माटी को थामे

पवन में झूमती 

है  कोमलांगी। 

3.

ले अँगडाई 

बीजों से निकलते 

नवपत्रक । 

4.

प्रफुल्लित है 

ये नन्हे प्यारे पौधे 

छूना न मुझे । 

-0-

2-शुभम जैन

1.

ममतामयी 

तू सोयी चिर निद्रा 

हम अकेले।  

 2.

 मेघ बरसे 

नैनो में घनघोर 

सूखा आँगन। 

 -0-

3-संजय जोशी “सजग ‘

1.

तोडती हाड़
बढ़ती महँगाई
जैसे पहाड़ । 
2
प्रकृति- रंग 
पहाड़- वृक्ष संग 
मिले उमंग। 
-0- 


Responses

  1. bahut sundar…kyunki;

    duhon ke aanshu/sawarta jindagi/shakti bana lo.

  2. सभी हाइकु सुन्दर हैं। आप सभी को हमारी बधाई !

  3. utkrusht rachnaaen
    badhaai .

  4. सभी हाइकु सुन्दर, भावपूर्ण , अर्थपूर्ण……!
    शशि पुरवार जी, शुभम जैन जी , संजय जोशी जी… आप सभी को हार्दिक बधाई !!!

    ~अनिता ललित

  5. sashi ji,shubham ji,sanjay ji apake likhe sabhi haiku achhe likhe hain. badhai.
    pushpa mehra.

  6. sabhi haiku sundar .. shubham ji ke haiku pahli baar padhe ..badhayi 🙂

  7. Bohot khoob haiku shashi ji,shubham ji, sanjay ji!!!!

  8. अति सुन्दर हाइकुI
    खास कर के-
    माटी को थामे
    पवन में झूमती
    है कोमलांगी।

  9. सुन्दर हाइकु के लिए बधाई…


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