Posted by: हरदीप कौर संधु | नवम्बर 12, 2013

दिल का शीशा


1-कमला निखुर्पा

1
कैसे सुलझी  

पहेली अलबेली 

खुल के खेली  |

2

आँखमिचौली 

सुख और  दुख से 

हार के जीती |

3

जलाती रही 

चुनौतियों  की आँच  

कुंदन  हुई |

4

खुले कपाट 

अंतस चेतना  के

फैला  उजास |

-0-

2-डॉ सुधा ओम ढींगरा

1

आँखें छलकें

सुधियों में आए माँ

दिन-त्योहार।

2

भीगी -प्रकृति

चाँदनी के रस में

निहारे चाँद।

3

दिल का शीशा

किरच हुआ टूटा

बेवफ़ाई से।

4

युग बदले

मन काहे बदले

आधुनिकता 

5
प्रेम से ख़ाली

दिल का राजा पैसा

आधुनिकता!

6
बेटी दे आग

बेटा मुँह छुपाए

चिता बाप की। 


Responses

  1. ज़िंदगी का सच… मन जलता भी है रमता भी है. गहन अभिव्यक्ति…

    जलाती रही
    चुनौतियों की आँच
    कुंदन हुई |

    प्रेम से ख़ाली
    दिल का राजा पैसा
    आधुनिकता!

    कमला जी और सुधा जी को बधाई.

  2. जलाती रही
    चुनौतियों की आँच
    कुंदन हुई |

    दिल का शीशा
    किरच हुआ टूटा
    बेवफ़ाई से।

    यथार्थपरक हाइकु । आप दोनों को हार्दिक बधाई


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