Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अक्टूबर 17, 2013

मीठी ममता


1-जितेन्द्र जौहर

हाइकु चंगा
कमण्डल में भरे
काव्य की गंगा!

-0-

2-कमला निखुर्पा

बन  मिसरी 

घुल जाए मन  में 

मीठी ममता ।

-0-

3-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

ममता -रस

बढ़ता सागर-सा

तुम्हें जो सोचूँ ।

 

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Responses

  1. jugnuon se chamakte haiku sabhi ko badhai
    rachana

  2. बहुत ही सुन्दर…बधाई…|

  3. वाह , बहुत सुन्दर हाइकु , सभी मन भा गए हार्दिक बधाई

    2013/10/17 “हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब पत्रिका’-2010

  4. गागर में सागर भर दिया .

  5. पूरी रस-धारा प्रवाहित करते तीनों हाइकु बहुत प्रभावी हैं …बहुत बहुत बधाई …सादर नमन !!

  6. बहुत ही सुंदर हाइकु । बधाई आप सभी को !

  7. हार्दिक धन्यवाद…!!


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