Posted by: हरदीप कौर संधु | अक्टूबर 8, 2013

नए हाइकु-संग्रह


भूमिका और आत्मकथ्य पढ़ने के लिए सम्बन्धित संग्रह के नाम को क्लिक कीजिए :

 

1-मन के द्वार हज़ार 

रचना श्रीवास्तव

2-माटी की नाव

रामेश्वर काम्बोज’हिमांशु’

3-ख़्वाबों की खुशबू

डॉ हरदीप कौर सन्धु

 


Responses

  1. अवधी के रस माधुर्य को समेटे बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति ‘मन के द्वार हजार ‘,सौंधी सुगंध लिए ‘माटी की नाव ‘तथा देश की संस्कृति-संस्कारों को मन में बसाए ‘ख़्वाबों की खुशबू’ ..तीनों ही हाइकु संग्रह हिंदी साहित्य की अनुपम निधि हैं …आ रचना जी ,काम्बोज भाई जी एवं हरदीप जी को बहुत बहुत बधाई …हार्दिक शुभ कामनाएँ !!

  2. हिंदी हाइकु का अवधी अनुवाद जो ‘मन के द्वार हज़ार’ के रूप में है, जिसकी भूमिका पढ़ते हुए जैसे मन में हज़ारों द्वार खुलते गए और अवधी बोली की मिठास के अनुभव का प्रवेश होता गया. निःसंदेह अनुवाद का यह कार्य कठिन और साहस भरा है क्योंकि मूल भाषा के भाव को बनाए रखते हुए हाइकु का गुण बरकरार रखना होता है. इस ऐतिहासिक कार्य में मेरे हाइकु को शामिल कर रचना जी ने मेरा मान बढाया है इसके लिए मैं ह्रदय से आभारी हूँ. रचना जी को कोटिशः बधाई और शुभकामनाएँ.

    ‘माटी की नाव’ शीर्षक में समाहित है सम्पूर्ण ब्रह्मांड का सत्य… हमारा जीवन, जो माटी की नाव पर सवार है जिसे एक न एक दिन मिल जाना है उसी माटी में जिससे वह जन्मा है, पर उससे पहले जीवन के तमाम अनुभव से गुजर कर ज़िंदगी को मंजिल तक पहुँच जानी है. काम्बोज भाई की लेखनी जितनी तीक्षण है उससे ज़रा भी कमतर नहीं है उनके जीवन के अनुभव और सोच की गहराई. मन की जाने किस-किस अवस्था में जाकर उनकी लेखनी का जन्म होता है, सदैव मैं चकित हो जाती हूँ. पुस्तक अभी तक पढ़ नहीं पाई हूँ, लेकिन इनकी लेखनी और इनका चिंतन निश्चित ही हमें भाव विभोर करेगा. काम्बोज भाई को सादर बधाई और शुभकामनाएँ.

    ‘ख़्वाबों की खुशबू’ की भूमिका पढ़ते हुए छोटे-छोटे ख़्वाबों की खुशबू चारो तरफ फ़ैलने लगी और हरदीप जी के ख़्वाबों को हाइकु के रूप में साकार होते देखा. कई वर्षों का संकलित अनुभव समेटे हरदीप जी के इन हाइकुओं में रंग भी है साधना भी और भावना भी. बेहद परिपक्व हाइकु संग्रह के लिए हरदीप जी को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ.

    काम्बोज भाई और हरदीप जी का हिंदी हाइकु के प्रति अगाध प्रेम ही है जो आज इतने हाइकुकारों को एक मंच मिला है और जिस मुकाम पर आज हिंदी हाइकु है गर्व होता है कि हम भी इसके हिस्सा हैं. हाइकु की दुनिया में जब एक बार मन रम जाता है फिर बड़े-बड़े भाव को छोटे-छोटे शब्द अपने में समा लेते हैं और हाइकु रच जाता है. आप दोनों को इस अथक प्रयास और सराह्निये कार्य के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ.


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