Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 29, 2013

देख अकेला


सुशीला श्योराण

1

दिलों के बीच
फैलता हुआ मौन
ले डूबा प्यार ।

2

मृगतृष्‍णा है
तेरी प्रीत साजन
मन माने ना !
3
लड़ी ख़ुद से
हारती ही रही मैं
तेरे प्रेम से ।
4

गीता-क़ुरान
दोनों लहूलुहान
कहाँ ख़ुदाई !
5
वही मंज़र
जहाँ गई नज़र
तन्हा बशर ।
6

बेमानी रिश्ते
लिपटे केंचुली से
तन-मन से !
7

वट की छाँव
सुस्ताती हैं पीढ़ियाँ
स्मृति की ठाँव ।
8

कभी दो दिख
सपनों में  ही मिल
यूँ न बिछड़ ।
9
देख अकेला
गले मिलीं प्यार से
फ़िक्र, तन्हाई ।
-0-

 


Responses

  1. विविध रंगों से सजी ..उत्तम कृतियाँ ..
    9
    देख अकेला
    गले मिलीं प्यार से
    फ़िक्र, तन्हाई ।
    शुभकामनाये

  2. सभी हाइकु सामयिक और सोचने के लिए प्रेरित करते हैं ! आपके हाइकु पढ़कर मेरा मन कहने लगा ” कोई भी धर्म / कहता नहीं लड़ो / बनो बेशर्म। ” । सुशीला श्योराण जी आपको हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।

  3. सभी बहुत भाव प्रवण हाइकु हैं …..

    गीता-क़ुरान
    दोनों लहूलुहान
    कहाँ ख़ुदाई !……सामयिक….सटीक ..बधाई आपको !

  4. dilon ke biich failta hua maun le duba pyar. apake haiku aj ke yathart ko vyakt karte hain. badhai sushila ji.

  5. सभी बहुत बेहतरीन हाइकु हैं,पर इस वाले में कितनी गहरी बात कह दी अपने…
    गीता-क़ुरान
    दोनों लहूलुहान
    कहाँ ख़ुदाई
    बहुत बधाई…|


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

श्रेणी

%d bloggers like this: