Posted by: हरदीप कौर संधु | सितम्बर 26, 2013

पहाड़


शशि पुरवार

1

अडिग खड़ा

देखे कई बसंत

संत पहाड़ ।

2

उगले ज्वाला

गर्म काली लहरें

स्याह धरती ।

3

चंचल भानु

रास्ता रोके खड़ा है

बूढा पर्वत ।

4

धोखा पाकर

पहाड़ जैसी बनी

नाजुक कन्या।

5

हिम से ढके

प्रकृति बुहारते

शांत भूधर।

6

शैल का अंक

नाचते है झरने

खिलखिलाते।

-0-


Responses

  1. ” धोखा पाकर / पहाड़ जैसी बनी / नाजुक कन्या। ” सभी हाइकु पसंद आये हैं। पहाड़ से हूँ तो पहाड़ के लिए यही कहूँगा ” पहाड़ तोड़े / जब वे झुके नहीं / इन लोगों ने। ”

    शशि जी, सुन्दर सृजन हेतु बधाई और शुभकामनाएं !

  2. सुंदर हाइकु
    बधाई .

  3. shail ka ank,,naachate hain jharane, khilkhilaate

    sabhi haiku bahut sundar,pahad aur uspar bikhari prakriti ki manohari chataa barkarar rahe, . sundar rachana hetu badhai

    pushpa mehra

  4. सभी हाइकु बहुत सुंदर शशि जी!
    हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ आपको!

    ~सादर!!!

  5. धोखा पाकर

    पहाड़ जैसी बनी

    नाजुक कन्या।

    बहुत भावपूर्ण, बधाई.

  6. सभी हाइकु पसंद आये ” धोखा पाकर / पहाड़ जैसी बनी / नाजुक कन्या। ” विशेष रूप से
    शशि जी, भावपूर्ण सृजन के लिए बधाई और शुभकामनाएं !

  7. मोहक हाइकु ….
    ‘शैल का अंक’ ,’नाजुक कन्या ‘..और ..’संत पहाड़ ‘ बहुत अच्छे लगे …बधाई शशि जी !

  8. चंचल भानु

    रास्ता रोके खड़ा है

    बूढा पर्वत ।
    बहुत सुन्दर…बधाई…|


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