Posted by: हरदीप कौर संधु | सितम्बर 23, 2013

केसरी जादू


 

1-डॉ सुधा गुप्ता

1

इठला रही

श्वेत गुलदाउदी

केश बिखेरे ।

2

फूलों के खेत

हँस,हाथ हिलाते

पास बुलाते ।

3

होते ही संझा

महक  उठती है,

रजनीगंधा ।

4

श्वेत कमल

खिले ताल,घरा पे

श्वेत गुलाब।

5

हर सिंगार  

रोए ,उमर भर

पत्तों पे सोए

6

शेफाली हँसी

बगिया जो महकी

मैना चहकी

7

हवा झुलाती

पारिजात झारता

केसरी जादू ।

-0-

2-रचना श्रीवास्तव

1

तेरे आँगन
बो दूँ अपनी ख़ुशी
यही है प्यार ।
2
मेरा  दर्द तू
समेटे  पलकों पे
यही है प्यार।
3
मेरी चिंता की
खुद से भी पहले
यही है प्यार  ।
4

पतझर में
बहार बन छाए
यही है प्यार  ।
5
मरुभूमि  में
बने प्यासे की बूँद
यही है प्यार  ।
6
काँपती लौ
सँभालें जब हाथ
यही है प्यार ।

-0-


Responses

  1. बहुत ही सुंदर हाइकु, दोनों रचनाकारों को हार्दिक बधाई ।

  2. सुधा दी के बिंब अत्यंत मोहक हैं । रचना जी को भी सुन्दर सृजन के लिए बधाई !

  3. आदरणीयासुधा दीदी जी … आपकी लेखनी से ऐसी ही प्यारी-प्यारी सुगंध फैलती रहे … 🙂
    आपको, आपके भावों को व आपकी लेखनी को सादर नमन !

    ~सादर
    आपकी अपनी
    अनिता ललित

  4. रचना जी ..प्यार की बहुत ख़ूबसूरत परिभाषाएँ !:)

    हार्दिक बधाई!

  5. sudha ji ke vibhinn phoolon ki khushboo se bhare aur rachna ji ke pyar ke nanao roopon ko jeete haiku ki nirali hi shobha hai .sunder bhavon ke liye ap dono ko bahut badhai.
    pushpa mehra.

  6. बहुत ही सुंदर हाइकु ! सुधा जी – रचना जी, दोनों रचनाकारों को सुन्दर सृजन के लिए हार्दिक बधाई ।

  7. बहुत खूबसूरत हाइकु ! सुधा गुप्ता जी, रचना जी हार्दिक बधाई!

  8. फूलों की सुगंध और प्यार की भीनी बयार से भीगे हाइकु बहुत मन भाये | बधाई सुधा जी एवं रचना |

  9. एक तरफ प्रकृति की बहार तो दूसरी तरफ प्रेम की फुहार… सभी हाइकु बहुत सुन्दर. सुधा जी और रचना जी को बधाई.

  10. bahut khubsurat haiku hai sudha ji ,rachna ji hardik badhai aapko

  11. सुधा जी के हाइकू तो हमेशा की तरह अप्रतिम हैं…|
    रचना जी के हाइकू में प्यार की सुगंध महसूस होती है…|
    आप दोनों को हार्दिक बधाई…|

  12. आदरणीया सुधा दीदी जी की लेखनी मानो स्याही से नहीं प्रकृति के विभिन्न रंगों से भरी हुई हो …. सभी दृश्य साकार होकर अपना प्रभाव छोड़ते हैं। फूलों का मनमोहक रूप, उनकी सुगन्ध व उनका स्वभाव …. प्रकृति पर आधारित उनके हाइकु में बहुत ही सहज ढंग से दृष्टिगोचर होती है। उदाहरणस्वरुप निम्नलिखित हाइकु में गुलदाउदी का रूप, रजनीगंधा की खुश्बू तथा पारिजात का स्वभाव बहुत ही ख़ूबसूरत बन पड़ा है :

    गुनगुनी सी धूप में आँखों के आगे गुलदाउदी अपने पूरे मोहक रूप में झूमती हुई प्रतीत होती है-

    इठला रही
    श्वेत गुलदाउदी
    केश बिखेरे

    इसी प्रकार ….. शाम के फैलते अंधकार में अचानक से जैसे कोई सुगंध सी घुली महसूस होने लगती है-

    होते ही संझा
    महक उठती है
    रजनीगंधा

    अनायास ही झरते हुए, ज़मीन पर बिछे हुए हरसिंगार के फूल आँखों में बिछने से लगते हैं-

    हवा झुलाती
    पारिजात झारता
    केसरी जादू

    इतना सजीव चित्रण, इतना मनमोहक रूप … सुधा दीदी जी की क़लम ही खींच सकती है।

    ~सादर
    अनिता ललित


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