Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 11, 2013

शब्दों के बाण


वंशस्थ गौतम

1

नश्वर देह

भाँति-भाँति सजाई

काम न आई ।

2

मन का पंछी

उड़-उड़ थकता

नहीं चेतता ।

3

आशा का दीप

पल-पल बुझता

अँधेरा छाए ।

4

भारी -सी साँसें

रुक-रुक चलतीं

देह छोड़तीं ।

5

बढ़ते पग

तिल-तिल चलते

रुक जाते  हैं।

6

शब्दों के बाण

अहर्निश चलते

धँसते अंतस्  ।

-0-

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Responses

  1. बहुत अच्छे हाइकु…बधाई…|

  2. sabhi haiku bahut achhe hain.
    pushpa mehra.

  3. शब्दों के बाण

    अहर्निश चलते

    धँसते अंतस् ।……प्रभावी ….बहुत बधाई !


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