Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 30, 2013

श्वासों का स्पर्श


1-ज्योत्स्ना प्रदीप

1

मधुसूदन !

अंतहीन ऋण है

तेरे जन्म का। 

2

आशाएँ बनी

दौपदी के चीर -सी

ओर न छोर।

3

श्वासों का स्पर्श 

बेजान बंसी में भी 

भरता प्राण।

4

बाँसुरी लेटी 

हथेली की शय्या

सुर- सपने।

5

कमल-नेत्र

मन है कुरुक्षेत्र

बनो सारथी।

6

कौरव -मन

धृतराष्ट्र– इच्छाएँ

हारें सर्वदा।

7

दिव्य शिक्षिका

है श्रीमद्भगवद्-

गीता पावन।

-0-

2-मंजु गुप्ता 

 1

कान्हा -पग छू

यमुना ने दी राह 

वसुदेवको

2

वंशीधर से 

माँगा अधरामृत 

हर  गोपी ने ।

3

अनोखे रास 

गोपियों से करके 

दिलों को जोड़ा

4

चितचोर की 

मधुर तान पर 

नाचे गोपियाँ . 

-0-

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Responses

  1. बहुत उत्कृष्ट हाइकु. एक -एक हाइकू में विभिन्न भाव और सत्यम , शिवम् , सुन्दरम की अनुभूति | धन्यवाद ज्योत्स्ना जी, मंजु जी |

  2. आशाएँ बनी

    दौपदी के चीर -सी

    ओर न छोर

    बहुत सुन्दर बात कही है … आशाओं का इच्छाओं का कोई ओर-छोर नहीं होता।

  3. आभार आप दोनों का .

  4. jyotsana pardeep ji aur manju ji …aapke haiku bohot pasand aaye…

    आशाएँ बनी
    दौपदी के चीर -सी
    ओर न छोर।

    कान्हा -पग छू
    यमुना ने दी राह
    वसुदेवको ।
    hardik badhai!!!!


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