Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जुलाई 28, 2013

सभी की आँखें


 

1-डॉ शैलेष गुप्त ‘वीर’

 1

सभी की आँखें

टिकी हैं मुझ पर

बेखौफ हूँ मैं।

2

मम्मी की आँखें

न झील, न सागर

अश्रु-गागर।

 3

पैसे की भूख

लाँघ दी हर सीमा

मिटे रसूख़।

4

बहुत हुआ

अब आर या पार

सीमा पे रार।

5

बहकी रात

खिल्ली उड़ाता चाँद

हताश तारे।

6

टूटें तो टूटें

ख्वाब देखेंगे हम

पीड़ा हो तो हो।

-0-

 


Responses

  1. टूटें तो टूटें

    ख्वाब देखेंगे हम

    पीड़ा हो तो हो।
    बहुत आशावादी है…| सभी हाइकु पसंद आए…बधाई…|

  2. ख्वाब देखेंगे हम

    पीड़ा हो तो हो। हौसला रखने की चौनोती पूर्ण अभिव्यक्ति अच्छी है

  3. सकारात्मक सोच लिए प्रभावी प्रस्तुति …बधाई !!

  4. हाइकु पसंद करने व हौसला अफजाई के लिए आप सब का शुक्रिया।


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