Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जुलाई 24, 2013

मन- प्रांगण


1-सुभाष लखेड़ा

1.

मन के धागे 

जिसने सुलझाए

सुख हैं पाए।

2.

मन को मीत 

जिसने भी बनाया 

धोखा न खाया।

3.

मन पंछी है ,

स्व विवेक जगाओ 

जब  भी डोले।

4.

मन जोगी हो ,

इसको समझाओ–   

भोगी न होना।  

-0-

2-शशि पुरवार
1

मन प्रांगण
यादों के बादल से
झरते मोती ।

2
धीमा गरल
पीर की है चुभन
खोखला तन ।
3
पीर जो जन्मी
बबूल  सी चुभती
स्वयं की साँसें । 
4
दिल का दर्द
रेगिस्तान बनके
तन में बसा ।

5
दिल के तार
जीवन का शृंगार
तुम्हारा प्यार ।

-0-

Advertisements

Responses

  1. मन को मीत
    जिसने भी बनाया
    धोखा न खाया।

    मन से सच्चा मीत कौन हो सकता है । बधाई सुभाष लखेड़ा जी !

    मन प्रांगण
    यादों के बादल से
    झरते मोती ।

    सुंदर हाइकु लिखे हैं शशि जी । बधाई !

  2. Shashi purwarji, yaadien, dard aur chubhan to jeevan jeena sikhate haain.Aap ke haiku mein teeno ki gungunahat hai. Badhai
    Subhash lakheda ji, aap ne ‘man’ ke roopakon ki rassi khol di hai

  3. मन के धागे

    जिसने सुलझाए

    सुख हैं पाए।
    yadi aesa ho jaye to nafrat nahi rahegi
    sunder
    मन प्रांगण
    यादों के बादल से
    झरते मोती ।
    yadon ke moti bahut kimti hote hain
    pyare bhav
    rachana

  4. सुभाष लखेड़ा जी, शशि पुरवार जी आप दोनों के हाइकु बहुत सुन्दर हैं
    आप दोनों को बधाई!

  5. बहुत सुन्दर हाइकु…आप दोनों को बधाई…|

  6. सुंदर प्रस्तुति .

    बधाई .


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: