Posted by: हरदीप कौर संधु | जून 25, 2013

दर्द की धूप


हरकीरत हीर

1

 सात रंगों की

आँख से टपकी है

दर्द की धूप  

2

नहीं जानती

तुम थे या था भ्रम

ख़्वाबों में  संग  

3

इक  दर्द था

जो  जला रात भर

संग  मेरे था  

-0-


Responses

  1. बेहद खूबसूरत। कोई एक हाइकु दूसरे से ज्यादा दर्द समाये हुए है, कहना मुश्किल है।कई बार दर्द शब्दों में खूबसूरती भर देता है, यही गहरायी वाली धूप बहुत गर्म व् सुकून देने वाली है, क्यूंकि कहीं न कहीं रचना करने वाले के मन की तपिश को उसने कम किया है।

  2. आँख से टपकी है

    दर्द की धूप ….

    jab bhi Harkirat ji ko padhti hun anayas hi Amrita Preetam ji ki yaad aa jati hai … utna hi khoobsurat shabdon ka chunav, bhavon ka sanyojan …. kul mila kar dil ki baat dil tak pahunchati huyi sundar rachna ….

  3. सात रंगों की
    आँख से टपकी है
    दर्द की धूप ।…….वाह….बेहद सुंदर……बधाई

  4. सात रंगों की
    आँख से टपकी है
    दर्द की धूप।…..बहुत बढ़िया….बधाई!

  5. sunder evam bhavpoorn haaiku ….

  6. हर रचना अपने में एक पूरी कहानी समाये हुए.. ! गहरे रंग से बनी सुन्दर तस्वीर हर एक हाइकु.. ! बहुत सुन्दर.. !

  7. Dard ki bahut sundar abhivyakati. Badhaai

    pushp[a mehra

  8. दर्द भरे बहुत मार्मिक हाइकु…बधाई…|


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