Posted by: हरदीप कौर संधु | जून 22, 2013

प्रकृति का प्रकोप


1-हरदीप सन्धु 

1-प्रकोप1

गूँगे हैं शब्द

चीखों के बीच चुप्पी 

शोर पे भारी । 

 2

चुप्पी के बीच 

एक चीख है छुपी 

बहरे कान । 

3

सलीब टँगी 

असहाय ख़ामोशी 

मुर्दा सन्नाटा । 

-0-

2-डॉ  ज्योत्स्ना शर्मा

2-प्रकोप1

माने है मन 

भयंकर त्रासदी 

साँसों की चुप्पी !

2

हारेंगें नहीं 

मिलजुल सँवारें

सन्नाटा तोडें !

3

किसने तोड़ा 

बदरा का जियरा 

मन है अवाक् !

4

क्योंकर फटा

बदरा का जियरा

कौन बताए ?

-0-

3-डॉ अनीता कपूर

1

चुप्पी रीतती

सन्नाटे को उछाल

दु:ख का ज्वार  ।

2

बावरी चुप्पी

सन्नाटे से सेंकतीं

पूस की रात ।

3-प्रकोप3

मौत की चुप्पी

आत्मसंवाद करे

सन्नाटे तले  ।

4

ठूँठ -सा खड़ा

रेतीला-सा सन्नाटा

चुप्पी भी काँपी   ।

5

बर्फीली चुप्पी

सन्नाटे से सिहर

बूँद में ढली  ।

-0-

4- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
1

चुप्पी तोड़ी तो,
खूब कहर ढाया।
बादल फटा ।
2

आयी आफत ,
बाढ़ के आंतक से,
फैला सन्नाटा ।
-0-

5-कृष्णा वर्मा

1

चुप्पी को तोड़

बादल यूँ दहाड़े

टूटे किनारे।

2

ऐसा लगाया

कुदरत ने चाँटा

छाया सन्नाटा।

-0-

6-भावना सक्सैना

4-प्रकोप1

क्षत हृदय

सन्नाटा आसमानी

पाया धरा ने ।

-0-

7-मंजु गुप्ता

1

सन्नाटा छाया 

प्रकृति-प्रकोप ने 

निगली जानें ।

-0-

8-शैफाली 

1

प्रकृति खेलें 

मानव पूछें प्रश्न
‘उसकी’ चुप्पी 

2

छा रहा तम 

धूमिल है सन्नाटा 

मानव चीखें 

-0-


Responses

  1. आदरणीय काम्बोजजी के द्वारा दिए अनूठे विषय में ..भीगी . भावभीनी रचनाओं से मन को मोह लिया.. और हमारे हाइकुकारों ने चुप्पी से भी कितना कुछ कहलवा लिया … वाह 🙂

    क्योंकर फटा

    बदरा का जियरा

    कौन बताए ?

    चुप्पी को तोड़

    बादल यूँ दहाड़े

    टूटे किनारे।

    ऐसा लगाया

    कुदरत ने चाँटा

    छाया सन्नाटा।

  2. behad maarmik ghanta …. rachnakaro ne kudrat ke is prakop ko behtreen tarike se darsanne me koi kasar nhi chhodi … sach me ye kudrat ka badla hai insaan se … naman 🙂

  3. prakrti ka marmik drishya sab rachnakaaron mi chuppi tod gaya.badhaaai.

    Pushpa mehra

  4. इस दुखद चुप्पी को शब्द देने के लिए आभार ……

  5. क्या कहा जाए…मन को छूते हाइकु के लिए बहुत बधाई…|

  6. आपकी संवेदना शब्दों में बखूबी ढली है। सुंदर हाइकु

  7. गूँगे हैं शब्द

    चीखों के बीच चुप्पी

    शोर पे भारी

    सभी हाइकु जल प्रलय की त्रासदीयों को जैसे गवाह हो . उपरोक्त हाइकु विशेष लगा .

  8. भयावह तबाही को व्यक्त करते मार्मिक हाइकु …बहुत दुखद मंजर …

  9. sannate se
    sannate ko lahate
    sundar haiku

  10. बहुत गहरे सभी हाइकु.. !

    ॐ शांति !


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