Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 14, 2013

टूटी चौपाल


रामस्वरूप मूँदड़ा

1

सब खो गए

शेष रह गया मैं

एकाभिनय ।

2

छलकपट

ज़िन्दगी भर किया

रोकर जिया ।

3

माटी का घर

माटी में मिलना है

आत्मा अमर ।

4

खुली जटाएँ

छाई काली घटाएँ

आएगा पानी ।

5

रूप निखरा

अश्रुजल में भीग

हँसा चेहरा ।

6

तुम्हारी याद

चित्रशाला हो गई

आँखों के आगे ।

7

टूटी चौपाल

गए बैकुण्ठधाम

वे संगी -साथी

8

जितना दिया

उससे कम लिया

यही बचत ।

9

एक हिचकी

यादों का समन्दर

लहरा गई ।

10

कौन चुराता ?

छिपे रहे मन में

तुम्हारे अक्स  ।

11

रखना याद

दर्द भरे दिन में

रहना मौन ।

-0-


Responses

  1. सभी सुन्दर भावात्मक हाइकु….हार्दिक बधाई!

  2. कौन चुराता ?
    छिपे रहे मन में
    तुम्हारे अक्स ।

    विरह अपने चरम पर। बहुत सुन्दर हाइकु। अन्य भी सुंदर।

  3. बहुत भावपूर्ण हाइकु …

    रखना याद-
    दर्द भरे दिन में
    रहना मौन ।….सत्य !

    -0-

  4. I Read first Time ………Thanks to Mr. Ramswaroop Mundra.

    सभी सुन्दर भावात्मक हाइकु….हार्दिक बधाई!………….Nanji

  5. teesra,chautha,athwan haiku manko bhaya badhai.

    Pushpa Mehra

  6. कौन चुराता ?

    छिपे रहे मन में

    तुम्हारे अक्स ।
    भावपूर्ण हाइकु के लिए बधाई…|

  7. कौन चुराता ?
    छिपे रहे मन में
    तुम्हारे अक्स ।

    वाह ! सच्चा खजाना पास तो कैसा डर.. !
    सभी रचना बहुत सुन्दर हैं.. !!


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