Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 16, 2013

शब्द बनें पावन


मंजुल भटनागर
1

सुप्त कलियाँ
सौरभ शिशु- मन
आलस तन ।

2

रंगरेजन
कृष्ण प्रीत नयन
पीत वसन।

3

जो हँसती थी
मुस्कराने पर भी,
अब सोचती ।

4

ओस गहने
प्रेयसी ने पहने
रातें कुंदन ।

5

फागुन आस
पल्लव -परिहास
कान्हा का रास !

6

रंगरेजन
राधा पुखराज -सी
कान्हा गुलाल ।

7

एक चेहरा
रंगों के नकाब में
तेरा न मेरा ।

8

इत्र सरसे
लता का परिहास
फागुन आस  ।

9

मौन निस्पंद
सत्य शिव सुन्दर
कंचन जंघा !

10

ओस में ढकी
दिव्य चाँदनी ओढ़े
एक सुबह !!

11

बर्फ से ढके
मौन हैं देवदार
सन्त सरीखे ।

12

 राज्याभिषेक
सुबह सूरज का
चाँद था कैदी !
13
घर मुँडेर 

पंछियों की उड़ान

मन बेचैन ।

14

नए सपने 

तशरीफ़ ले आए 

आ लोरी गाएँ  
15.

भाव गहन

शब्द बनें पावन 

न हो बंधन  ।
16

खेत उगाए  

आँगन में दीवारें 

ईंटें मुस्काएँ !

-0-

Advertisements

Responses

  1. जो हँसती थी
    मुस्कराने पर भी,
    अब सोचती ।
    सभी हाइकु बहुत सुन्दर यह अधिक भाया…बधाई।

  2. sabhi haiku uttam badhayi 🙂

  3. विविध भावों से परिपूर्ण सभी हाइकु बहुत सुन्दर हैं …बहुत बधाई !!

  4. जो हँसती थी
    मुस्कराने पर भी,
    अब सोचती ।
    kitni gahri baat kahi aapne bahut sunder badhai aapko
    rachana


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: