Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 12, 2013

माँ हथ जादू


डॉ हरदीप सन्धु

1.

जग दा  फेरा 

कितों नहीं लभिया 

माँ जिड़ा जेरा । 

2.

मोह दी तांघ 

मुकणी सांहाँ नाल 

माँ नाल साँझ ।

3.

धुप्प विच्च छाँ

अँखियाँ पढ़ लैंदी 

अनपढ़ माँ ।

4.

रड़के अख  

चुनी दे लड़ नाल 

माँ दिन्दी भाफ़  ।

5.

पीड़ बेकाबू 

पुडपड़ीयाँ झसे 

माँ हथ जादू 

-0- 

जेरा = जिगर 

तांघ = इच्छा
सांहाँ= साँस 
पुडपड़ीयाँ=कनपटी ,पुटपड़ियाँ
 झसे = मालिश 
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Responses

  1. रड़के अख

    चुनी दे लड़ नाल

    माँ दिन्दी भाफ़ ।

    sabhi haiku lajwaab …!!

  2. आप इन खूबसूरत हाइकु का इस प्रकार भी स्वाद लें सकते हैं ….
    1
    जग का फेरा
    कहीं नहीं मिलेगा
    माँ सा जिगरा
    3
    धूप में छाया
    अखियाँ पढ़ लेती
    अनपढ़ माँ ।
    4
    रड़की आँख
    चुन्नी के लड़ साथ
    माँ देती भाप
    5
    पीड़ा बेकाबू
    माथा सहलाये
    माँ हाथ जादू ।

  3. बहुत बढ़िया पंजाबी भाषा में हाइकु , पीड़ बेकाबू

    पुडपड़ीयाँ झसे

    माँ हथ जादू

    इन पंक्तियों नाल माँ की सुंदर गल किती .

    हाइकु का जादू चमत्कार दिखा रहा है .

    हार्दिक बधाई बहन डॉ. हरदीप जी .

  4. बहुत सुंदर!
    हमें थोड़ी-थोड़ी पंजाबी आती है! हमारी मम्मी पंजाबी हैं..इसलिए… 🙂 मगर अच्छा किया जो हीर जी ने हिन्दी अनुवाद भी दे दिया! ठीक से समझ आ गये सभी हाइकु ! -धन्यवाद!:)
    ~सादर!!!

  5. वाह ..वाह …

    रड़के अख

    चुनी दे लड़ नाल

    माँ दिन्दी भाफ़ ।

    5.

    पीड़ बेकाबू

    पुडपड़ीयाँ झसे

    माँ हथ जादू

    दृश्य खींच दिया, बधाई!!!

  6. पीड़ बेकाबू
    पुडपड़ीयाँ झसे
    माँ हथ जादू

    बेमिसाल…हरदीप जी बधाई

  7. mujhe bhi thodi thodi punjaabi ati hai 🙂
    umda haikuz —@hardeep ji …sadar naman
    धुप्प विच्च छाँ

    अँखियाँ पढ़ लैंदी

    अनपढ़ माँ ।

  8. धुप्प विच्च छाँ

    अँखियाँ पढ़ लैंदी

    अनपढ़ माँ ।………बेमिसाल…हरदीप जी बधाई

  9. बहुत सुन्दर हाइकु …..सचमुच माँ शब्द में ही जादू है !!

  10. थोड़ी- थोड़ी पंजाबी में भी समझ आ ही गए हाइकु…पर हरकीरत जी के अनुवाद और हाइकु के नीचे दिए गए शब्दार्थों ने और भी आसानी से समझा दिए सारे भाव…|
    धुप्प विच्च छाँ

    अँखियाँ पढ़ लैंदी
    अनपढ़ माँ ।
    ये पंक्तियाँ तो कितनी सच हैं…|
    बधाई….|

  11. सभी हाइकु बहुत सुन्दर मगर ये शब्द तो माँ के पास होने का अहसास करा गए –

    “अँखियाँ पढ़ लैंदी

    अनपढ़ माँ ।

  12. प्रत्येक हाइकु सुन्दर। इन पंक्तियों ने तो ऐसा महसूस करवा दिया जैसे माँ पास बैठी हों –
    रड़के अख

    चुनी दे लड़ नाल

    माँ दिन्दी भाफ़


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