Posted by: हरदीप कौर संधु | मई 3, 2013

देश की धूप


डॉ.सुधा ओम ढींगरा 

1
विदेशी परी 

संकीर्ण परिवार
मन तड़पे
!
2

विदेशी धूप

माँ की गोद -सा सुख

दे नहीं पाए !
3

देश की धूप

थपथपाए तन 

माँ का प्यार!

4

आँचल कोरा 

धूल कहीं से उड़ी,

 दाग़ी विधवा।

5
मीत का धोखा
छलक जाए आँख

दिल न माने।

6
गहरी घटा

भीतर औ’ बाहर

घुटता मन

7

परदेस में
रोए जब भी बेटी

माँ आँखें पोंछे।

8
रब की मार

साईं उठा सिर से

दोष बहू का।

9

धुँधली आँखें

पोती राह दिखाए
टूटी ऐनक। 

-0-

मोरिसविले (यू एस)


Responses

  1. विदेशी धूप

    माँ की गोद -सा सुख

    दे नहीं पाए !…….क्या कहने…….बहुत अच्छे

  2. riston par sundar,komal,dukhad abhivaykti…badhai..

  3. टूटी ऐनक।
    धुँधली आँखें

    पोती राह दिखाए
    सभी बहुत ही भावपूर्ण हाइकु…. बधाई ….शुभकामनाएं !

  4. परदेस में
    रोए जब भी बेटी
    माँ आँखें पोंछे।
    di achchha likhne wala kisi bhi vidha me achchha likh sakta hai .aapne kamal kar diya hai .ek ek haiku bahut hi achchha hai.

  5. wah ek se badh kar ek badh kar ek haiku …kisi ek ki tarif karu to dusre ki upekshaa hogi …. subhkamnaye 🙂

  6. सभी हाइकु बहुत भावपूर्ण। सुधा जी बहुत बधाई।

  7. sabhi haiku bahut hi achhe hain. badhaai

  8. परदेश में बसे इंसान के मन की पीड़ा का बड़ा भावपूर्ण चित्रण है…बधाई…|

  9. हर दिन हो
    सुख समृद्धि पूर्ण
    शुभकामना


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