Posted by: हरदीप कौर संधु | अप्रैल 1, 2013

नन्ही -सी जान /मान -गुमान


वरिन्दरजीत सिंह बराड़ 

1

बाल विवाह 

बेरंग जिंदगानी 

प्रथा पुरानी 

 2

नन्ही सी जान 

आज भी क्यों चढ़ती 

कुप्रथा बली 

        -0-

डॉ रमा द्विवेदी

 1

मान -गुमान

सब खोता प्यार में

प्यार अशेष ।

2

अछूते रहे

प्रिय-मन अथाह

न पाई थाह ।

3

किसी मोड़ पे

काश मिल जाएँ वो

 करीब हैं जो !

4

प्रेम की प्यास

 बुझती नहीं कभी

सागर -पास ।

5

स्नेह -तलाश

सपने हुए ख़ाक  

फूलों में आग ।

6

प्रेम में धोखा   

ओस पर जलते  

 दिल के ज़ख्म ।

7

प्यार ही दिया  

इंतज़ार में कटी  

कटी पतंग ।

8

उनका मन  

ज्यूँ पुरइन पात

भीगता नहीं ।

9

प्रकृति वधू  

अलसाई -सी उठी  

अलस भोर ।

10

मधु ही मधु 

समन्दर से मिली 

खारी हो गई ।

11

अँखियाँ  भरीं

 चपला जगमग

पत्र-बाँचती ।

12

रोई है  निशा  

शबनम-सी झरी

भोर ढुलकी

 

 


Responses

  1. बहुत-बहुत सुंदर, भावभीने हाईकु … दिल को छू गये….
    ~सादर!!!

  2. बहुत सुन्दर भावों भरे हाइकु बहुत मन भाए..बधाई।

  3. बहुत सुन्‍दर हाइकु आप दोंनो को हार्दिक बधाई।

  4. bahut sundar …bhaav poorn haaiku …bahut badhaai !!

  5. Sundar !


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