Posted by: हरदीप कौर संधु | जनवरी 4, 2013

मन में जंग


अरुण सिंह रुहेला

1. 

आलसी पन्ने 

थामें चंचल शब्द 

तेरे नाम के ।

2. 

लाखों सपने 

बस एक सच है-

तेरी मुस्कान ।

3. 

मैं हूँ किनारा

पल आ -जा रहे हैं

मुझे भिगोते ।

5. 

फेरों का ताला 

अविश्वाश की चाभी 

मन में जंग ।

-0-

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Responses

  1. मैं हूँ किनारा

    पल आ -जा रहे हैं

    मुझे भिगोते ।
    बहुत अच्छा है..बधाई…|

  2. मैं हूँ किनारा

    पल आ -जा रहे हैं

    मुझे भिगोते ।

    bahut sunder bhav
    badhai
    rachana

  3. मैं हूँ किनारा
    पल आ -जा रहे हैं
    मुझे भिगोते ।
    बहुत सुन्दर…बधाई

  4. मैं हूँ किनारा

    पल आ -जा रहे हैं

    मुझे भिगोते ।.

    ..सभी अच्छे लगे…बधाई!!

  5. आलसी पन्ने
    थामें चंचल शब्द
    तेरे नाम के ।

    nayi soch, bahut2 badhai…

  6. आदरणीय प्रियंका गुप्ता जी, रचना जी, कृष्णा वर्मा जी, ऋता शेखर ‘मधु’ जी, डा. भावना जी .. आप के आशीष मिले.. हौसला बढ़ा मेरा.. !
    सहृदय आभारी हूँ !

    ~ अरुण रूहेला


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