Posted by: हरदीप कौर संधु | दिसम्बर 29, 2012

दुबके पंछी


भावना सक्सेना

1

शीत लहरसुबह लाई 

कोहरे की चादर 

धुआँ धुआँ -सी 

2

दुबके पंछी 

ले नीड़ संरक्षण 

सूर्य -प्रतीक्षा ।

3

सर्द हवाएँ 

गुम हुआ  सूरज 

आ मिल ढूँढें ।

 

4

पा नेह -ऊष्मा

पिघल उठे मन

सर्द हवा में  ।

5

आया न सूर्य

सब गुमसुम- से

ठंड के मारे ।

6

भीषण ठण्ड 

अस्त व्यस्त जीवन 

शीत लहर ।

7

लदते जाते

कपड़े तन पर

मन बंजारा ।

8

बुधवा बेचारा

काँपता भोला

सिमटती बुधिया

शीत -कहर ।

9

टूटा छप्पर

कम्बल न रज़ाई

निर्धन कुटी ।

10

पाए निर्धन

कुछ पल जीवन

सूर्य -दर्शन।

अलाव11

चाय की प्याली 

दहकते अलाव 

मददगार ।

-0-

( सभी चित्र गूगल से साभार)


Responses

  1. पा नेह -ऊष्मा
    पिघल उठे मन
    सर्द हवा में।
    बहुत सुन्दर हाइकु भावना जी बधाई।

  2. पाए निर्धन
    कुछ पल जीवन
    सूर्य -दर्शन।
    बहुत सुन्‍दर भावना जी । बहुत बहुत बधाई

  3. शीत ऋतु के सुंदर हाइकु !

  4. सभी हाइकु बहुत कंपकपी लिए हुए… ! बहुत सुंदर चित्रण भावना सक्सेना जी !
    ~सादर !!!

  5. बहुत सुंदर हाइकु भावना जी

    लदते जाते
    कपड़े तन पर
    मन बंजारा ।…..सुंदर….wah!

  6. पा नेह -ऊष्मा

    पिघल उठे मन

    सर्द हवा में ।…बहुत सुन्दर …बहुत बधाई !


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