Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | दिसम्बर 19, 2012

प्रेम का रंग ।


अरुण सिंह रुहेला

1

स्याही की बूँदे

लें आशाओं का रूप 

राह दिखाएँ ।

2. 

क्यों वर्ण- भ्रम 

सदा मुस्कान ही है 

प्रेम का रंग  ।

3. 

मन -मंदिर 

जले हैं दिन रात 

दुआ के दीये

4. 

साँझ की बेला 

मन में परिवार  

खुशी अपार

5

कच्चे रंगों से 

महकें पक्के रिश्ते 

मन वो कूँची

-0-

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Responses

  1. arun ji
    bnahut acche haiku ,aapki kalam nirantar pragati kare yahi shubhkamnaye .

  2. सभी हाइकु बहुत सुन्दर अरुण जी बधाई।

  3. आदरणीय शशि जी, कृष्णा वर्मा जी आप के आशीष मिले.. हौसला बढ़ा मेरा.. ! आप का बहुत आभार.. !

    ~ अरुण रूहेला


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