Posted by: डॉ. हरदीप संधु | दिसम्बर 4, 2012

शब्द -सुमनांजलि -3


22- डा० भावना कुँअ

1

उड़े जो ख्वाब

अँधेरे से पर ले

नींद लाचार ।

2

स्वर्ण छड़ियाँ

हाथ लिये सूरज

क्यों इतराए ।

3

तमतमाए

ज्यों ही सूरज,धूप

खिलखिलाए।

4

लेकर गई

सुनहरे सपने

आँधियाँ संग।

5

छलक गई

चाँद की गागर से

धुली चाँदनी।

-0-

 23-सावित्रीचन्द्र

1

उगा सूरज

पंछियों की उड़ान

तेज हो गई।

2

निकला चाँद

चाँदनी जाने फिर

कहाँ खो गई।

3

नन्हीं चिड़िया

चमकता उजाला

देख न पाई।

4

जागता रहा

रात भर जो चाँद

सुबह खोया।

 5

रौशन हुई

आ जाने से उनके

अँधेरी रात।

-0-

 24- मुमताज टी एच खान

1

मन के पंछी

कर बसेरा वहाँ

 खुशियाँ जहाँ।

2

नेह से भरे

नैन जब मुस्काएँ

मन हर्षाए।

3

 दु:ख रुलाए

 सुख गुदगुदाए

 यही जीवन।

4

 शर्मिली धूप

  आँगन में उतरी

 छिपी दुबकी 

5 

उड़ा ले चली

फिर वृक्षों के वस्त्र

सर्द हवाएँ।

-0-

25– नमिता राकेश
1

दूर हूँ तो भी
एहसास की खुशबू
छू लेगी उसे 
2
बहती नदी
जाने है बहाना भी
रो उससे 
3
घर महके
प्यार की खुशबू से
इत्र नहीं है  
4
सर्दी बढ़ी तो
दिवस के पल की
उम्र सिकुड़ी  
5

निर्धन काँपे
आस की चिता जला 
हाथ है तापे  

-0-
 26- 
राकेश नमित  
1

किताबें हटा
ज़िन्दगी हसीन है
बाहर तो आ  
2

कौन सुनेगा ?
बहरी सरकार
न कर रार  
3
ओ रे नादान
शिला 
में भगवान ?
मूर्ख इंसान  ।
4

कहाँ इंसान
सफ़ेद लिबास में
छिपा शैतान  
-0-
 

27-उमा घिल्डियाल

1

मिट्टी की गन्ध

भूलते जा रहे  हैं

सीमन्त मार्ग ।

2

माँ का आँचल

विज्ञापनी साड़ी में

खोता जा रहा ।

3

माँ की बिन्दिया

मन में कौंधती  है

चाँद देख के ।

4

यक्ष का मेघ

सन्देश भूल गया

प्यार- प्रेम का ।

5

बीता समय

नए रूप लेकर

लौट आता है

-0-

 28-ज्योतिर्मयी पन्त

1
घन गज से
फुहारें  दें नभ से
ओले मोती से ।
2

हिम मानव
बच्चे करें सृजन
धूप से डरें ।
3

श्वेत रजाई
हिम रुई भराई
धरा सजाई
4

ओले गिरते
मोती की चिलमन
चाँदी धरा पे ।
5

हवा बौराई
ठण्ड में ठिठुरती
दौड़ती आई ।
-0-

29-अनुपमा त्रिपाठी

1

प्रभु हैं संग

भाँति- भाँति के रंग

देते उमंग ।

2

जोगिया रंग

भर लाया  प्रभास

फैला उजास ।

3

भोर की बेला

धुँधलका मिटाए

मन रमाए  ।

4

प्रभु आशीष

जब  भोर मुस्काए

प्रकाश छाए ।

5

मन मंदिर

पावन ज्योति  जले

जियरा  खिले  ।

-0-

30- वरिन्दरजीत सिंह बराड़ 

1.

छोड़ा तुमने ,

गम ही गम दिया 

दिल बिखरा ।

2.

जीवन नदी 

डूब प्यार भँवर 

मिला किनारा 

3.

पत्थर दिल

भावनाओं से मुक्त 

पिघले नहीं ।

4.

खुले हैं जख़्म  

बिन दर्द टूटता 

काँच सा दिल 

-0-

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Responses

  1. सभी रचनाकारों के हाइकु …सार्थक …….
    आप सबको बधाई

  2. waah sabhi haiku karo ke haiku bahut sundar manbhavan lage sabhi ko badhai

  3. इस सुमनांजलि में संकलित हाइकू किसी संग्रह को पढने का सा आनंद दे गए…|
    आभार…|

  4. बहुत सुन्दर हाइकु माला …मोहक प्रस्तुति के लिए बधाई …!!

  5. डॉ सत्यभूषण वर्मा जी के जन्म दिन पर इस विशेष आयोजन के लिए डॉ. हरदीप संधु जी और रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ भाई जी को हार्दिक बधाई !
    डॉ सुधा गुप्ता दी और अन्य सभी हाइकुकारों के श्रेष्‍ठ हाइकु पढ़कर मन आनंदित हो गया।
    सभी रचनाकारों को बधाई !


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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