Posted by: हरदीप कौर संधु | नवम्बर 28, 2012

हाइकु-संगोष्ठी


उदिता सच्चिदानन्द , डॉ विमल,स्वामी जी और प्रो हिदीआकी इशिदा

काव्य शोध संस्थान के तत्त्वाधान में  भारतीय विद्या भवन, कॉपरनिक्स लेन कस्तूरबा गाँधी मार्ग , नई दिल्ली में द्वि दिवसीय  संगोष्ठी का अयोजन किया गया । 27 नवम्बर को   प्रथम सत्र में डॉ स्वामी श्यामा नन्द सरस्वती ‘रौशन’ के हाइकु संग्रह ‘ रौशन हूँ मैं’ का विमोचन हुआ । इस सत्र की

प्रो सादिक

अध्यक्षता  सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ गंगा प्रसाद विमल ने की , मुख्य अतिथि थे -हिन्दी और जापानी भाषा के विद्वान् प्रो हिदीआकी इशिदा । हाइकु विधा पर प्रो सादिक ने बीज वक्तव्य प्रस्तुत किया ।

जापानी और हिन्दी की विदुषी सुश्री उदिता सच्चिदानन्द  ने

उदिता सच्चिदानन्द

(ये   हाइकु के अनुवाद का काम करती रही हैं) भारत में हाइकु में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी । इस सत्र के अध्यक्ष डॉ गंगा प्रसाद  विमल ने कहा -‘पूर्व के लोग अपूर्व होते हैं। हाइकु में चित्रात्मकता महत्त्वपूर्ण है । हाइकु के सम्मिश्रण से ग़ज़ल रुबाई निर्मित कर दी । यह कार्य एक शैली को और व्यापक बनाता है । तमाम विभिषिकाओं से  जूझने वाले जापानियों का कौशल है अनुद्वेग  । साहित्य में प्रयुक्त वाक्य भी वैसा ही होना चाहिए -अनुद्वेगकारी यानी सरल हो और उद्वेगहीन हो ।

लक्ष्मीशंकर बाजपेयी ने कहा -हाइकु केवल छन्द नहीं , उसमें काव्य भी होना चाहिए । डॉ तोमोको किकुचि बीस साल से भारत मे रह रही हैं और हाइकु के अनुवाद कार्य से भी जुड़ी हैं । आपने  हाइकु , चोका आदि का परिचय दिया । आपने योसा बुसोन के हाइकु का अनुवाद सुनाया । आपके इस अनुवाद में हिन्दी का वर्णविधान देखा जा सकता है –

सुन्दर रात  / चन्द्रमा मुझे दे दो / बच्चा रोता है।

डॉ शेरजंग गर्ग ने  हाइकु पर जानकारी प्रस्तुत की । रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ ने हिन्दी हाइकु और त्रिवेणी के द्वारा किए जा रहे हाइकु , हाइगा, ताँका, सेदोका और चोका की जानकारी दी तथा भावकलश ( ताँका संग्रह) , ‘यादों के पाखी( हाइकु-संग्रह),अलसाई चाँदनी ( सेदोका संग्रह) के द्वारा विश्व भर के रचनाकारों को इन विधाओं से जोड़ने की जानकारी भी  दी । साथ ही डॉ हरदीप सन्धु द्वारा हाइकुलोक ( पंजाबी) के माध्यम से जापानी नियम के अनुसरण की महत्त्वपूर्ण  जानकारी भी  दी।साथ ही डॉ स्वामी श्यामा नन्द सरस्वती ‘रौशन’ के हाइकु संग्रह ‘ रौशन हूँ मैं’ का भी समीक्षात्मक परिचय प्रस्तुत किया ।

प्रो हिदीआकी इशिदा ( जापान)

 कार्यक्रम के उपरान्त  हिमांशु ने प्रो हिदीआकी इशिदा को ‘झरे हरसिंगार’(ताँका- संग्रह), सुश्री उदिता सच्चिदानन्द  और डॉ तोमोको किकुचि को हाइकु , ताँका और सेदोका -संग्रह  भेंट किए । इन पर आने वाले वाले समय में अनुवाद-कार्य हो सकता है ।

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प्रस्तुति- काव्य शोध संस्थान

 


Responses

  1. बहुत प्रसन्नता हुई देख कर और पढ़ कर !:)
    हार्दिक बधाई हिमांशु भाई साहब, तथा इससे जुड़े सभी गुणी जनों को ! 🙂
    हमारी शुभकामनाएँ सदा ही आप सब के साथ हैं..!:)
    ~सादर !!!

  2. बहुत अच्छा लगा इस संगोष्ठी के बारे में पढ़ कर…आभार…।

  3. बहुत अच्छी जानकारी…आभार !!

  4. हाइकु संगोष्ठी के विषय में पढ़ कर बहुत प्रसन्नता हुई।
    आदरणीय हिमांशु जी, हरजीत जी आप को मेरी
    हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

  5. bhaiya ye padh kar bahut hi achchha laga .aap sabhi ki mehnat hai jo aaj itne log haiku likh rahe hain
    bahut bahut badhai
    saader
    rachana

  6. हाइकु संगोष्ठी की झलक देखकर बहुत प्रसन्नता हुई …प्रयास निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर हो ऐसी शुभ कामनाओं के साथ ….सादर …ज्योत्स्ना

  7. jaankaari ke liye shukriya Himanshu ji.

  8. डॉ स्वामी श्यामा नन्द सरस्वती ‘रौशन’ जी को बधाई . जग के साहित्य शिखर में उनकी इस कृति को अद्वितीय सौपान मिलेगा . सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ गंगा प्रसाद विमल जी जिस संगोष्ठी की अध्यक्षता करें तो वह कार्यक्रम साहित्य जगत की ऊँचाइयों को दर्शाता है .
    आदरणीय डॉ गंगा प्रसाद विमल जी ने मेरी पुस्तक ‘ भारत महान ‘ की समीक्षा भी लिखी है .हार्दिक बधाई हिमांशु भाई साहब जी , डॉ हरदीप सन्धु जी को जिनका प्रयास हाइकू संसार को जोड़ने के लिए सराहनीय है .

  9. हाइकु संगोष्ठी का सफल आयोजन का विवरण पढ़कर बहुत अच्छा लगा ……हाइकु साहित्य निरंतर यूँ ही प्रगति पथ पर अग्रसर रहे हमारी यही शुभकामनाएं है । अभी 25 नवम्बर को ही प्रो विमल जी से मुलाकात हैदराबाद की एक गोष्ठी में हुई ..वे मुख्य वक्ता थे …बहुत अच्छा बोलते है । हिमांशु जी ,और डॉ हर दीप जी हाइकु साहित्य पर बहुत सराहनीय काम कर रहे हैं हमारी शुभकामनाएं सदैव उनके साथ हैं । डॉ स्वामी श्यामा नन्द सरस्वती ‘रौशन’जी के हाइकु संग्रह ‘ रौशन हूँ मैं’ का विमोचन पर उन्हें हमारी अनेकानेक बधाई एवं शुभकामानाएं —

  10. आदरणीय हिमांशु जी एवं हरदीप जी के सतत प्रयत्नों का सुफल, इस सफल हाइकू संगोष्ठी के रूप में हम सबके सामने आया है …इस विशाल एवं सफल आयोजन के लिए बधाई …

    हिमांशु जी एवं हरदीप जी यह दोनों अपनी व्यस्तताओं के बीच भी इस साहित्य यात्रा को जारी रखने के लिए सदा प्रयत्नशील रहते हैं और इसे निर्बाध गति से जारी रखे हुए हैं। हिंदी हाइकू के साथ जुड़ना मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से अत्यंत सम्मान, गौरव एवं हर्ष की बात है … यद्यपि मै पिछले कुछ समय से हिंदी हाइकू की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग नहीं ले पा रही हूँ फिर भी आदरणीय संपादकों ने मुझे इस से जुड़े रहने का अवसर प्रदान किया है इसे मै अपना सौभाग्य मानती हूँ। और हृदय से धन्यवाद् करना चाहती हूँ .

    सादर
    मंजु


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