Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | नवम्बर 13, 2012

प्रेम की बाती


14- सुशीला शिवराण

1

प्रेम की बाती

श्रद्धा का भर तेल

यूँ जल दीप !
2

दीप हैं या हैं

ज़मीं पर सितारे

बिछुड़े प्यारे !

3

आए अयोध्या

राम, लखन, सिया

जलाओ दीया ।
4

गाओ बधाई

जागे अवध भाग

आए श्री राम !


5

दीपों की लड़ी

भरे दिल उजास

आई दिवाली ।


6

उतरे तारे

अमावस की रात

देखो धरा पे ।

7

घुटती साँस

धरा बदहवास

त्यागो पटाखे ।

8

आलोक पर्व

द्यूत-क्रीड़ा, मदिरा

भरें तमिस्रा ।

9

तोहफ़े बाँटो

साथ में बाँटो प्यार

तभी त्योहार ।
-0-

15-डॉ ज्योत्स्ना शर्मा

1

वरदायिनी

शुभदा सिंधु सुता 

तव स्वागत !  

2

विघ्न नाशक

हे पार्वती नंदन 

अभिनन्दन !

3

शुभ वंदन

लाजा संग खिलौने

करूँ पूजन । 

4

प्रदीप्त किया

एक आस्था का दिया

दीपित हिया ।  

5

जलाएँ ज़रा

एक दीप कर्त्तव्य का

पथ ज्योतित । 

6

ज्योति वसना

रहे तम नाशिनी

दीपमालिका । 

7

शुभ कामना

दया ,प्रेम ,सुख से

भरे भावना ।

8

उजियार हो

खुशियों के रंग से

सजे अल्पना । 

9

दीप से दीप

मिलें, मन से मन 

यही कामना 

-0-

16-कमला निखुर्पा

1

भीगी-भीगी-सी

देहरी झोंपड़ी की

गेरू से लिपी ।

2

देहरी सजी

सुन्दर-सी अल्पना

रंग बिखरे ।

3

नेह-पूरित

बाती को पुकारता

माटी का दिया

4

नाजुक बाती

दीपक से जा लिपटी

नेह से भीगी ।

5

दीप ने चूमा

नन्ही बाती का माथा

पुलक उठी ।

6

प्यारी-सी बाती

पुलकी जल उठी

जगमगाई ।

7

रौशन हुई

वो टूटी-सी झोंपड़ी

खिले चेहरे ।

8

विद्युत-युग

जगमग करते

ऊँचे महल ।

9

ऊँचे महल ।

इतराती फिरती

बिजली रानी ।

10

खिल्ली उड़ाती

बिजली की झालर

नन्हे दीप की ।

11

नन्हा-सा दीप

मन्द-मन्द मुस्काए

ज्योति लुटाए ।

12

भड़की बाती-

‘मैं चुप न रहूँगी

हार न मानूँ ।

13

बाती ने कहा-

‘पावन पूजित है

मेरा ये दीप ।

महके वृन्दा

सजे तुलसी चौरा

ये वृन्द-दीप

15

देव मुदित

रौशन गर्भ-गृह

है गर्भ दीप

16

राह दिखाए

भटके पथिकों को

आकाशदीप ।

17

पूजा का थाल

धन्य हुआ पाकर

अर्चन-दीप ।

18

पूर्ण कामना

जले जो  निश- दिन

अखण्ड ज्योति ।

-0-

17-डॉ अनीता कपूर

1

गुनगुनाती

दिवाली उजियारी

नेह की बाती 

2

ज्योतिपर्व

बस्तियाँ अँधेरों की

रौशन करो 

3

दीपमालाएँ

राख हों इमारतें  

नफ़रतों की  

4

दीप लड़ियाँ  

जैसे नृत्य करती

ज्योति-बालाएँ

5

इस दिवाली

से शुरू करें प्रेम

पाठशालाएँ

6

इस दिवाली

रौशन हों मन के

राजमहल ।

7

तेल प्यार का

मन को बना बाती  

रोज़ दिवाली 

8

लक्ष्मी पधारें

कुंकुम भरे पैरों

यही कामना 

9

दीपमाला या  

झड़ी जुगनुओं की

सो गया चाँद

-0- 

18- भावना सक्सेना

1

उल्लास भरे

मन में निरंतर

लौ दीपक की 

2

रात दिवाली

धरती पे सितारे

उतरे सारे 

 3

उल्लास भरे

ये मन में अनंत

दीपों की पाँति 

 4

दीप -पटाखे

फुलझड़ी अनार

शुभ त्योहार 

 5

आई दिवाली

पुलक उठा मन

रातें रौशन 

-0-

19-सावित्रीचन्द्र 

1

हे लक्ष्मी मैया

भरना मेरी झोली

आशीर्वाद से।

2

चारों तरफ

जब फैली हो आग

कैसी दीवाली।

3

मिलावट है

हर चीज में यहाँ

चखना मत।

4

न जाने कैसा

पटाखों में बारूद

बचना जरा।

5

आतंकी घेरे

करीब न आ पाएँ

शुभकामनाएँ।

6

जलते नहीं

तेल से भरे दीए

जो स्नेह नहीं।

7

लगी है बड़ी

मँहगाई की मार

फीका त्योहार।

8

दुःखों की आग

जले ज्यूँ पटाखे से

लगी दीवाली।

9

मिट्टी के दीए

तेल,बाती का संग

खुश थे हुए।

-0-

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Responses

  1. sundar haiku ke saath dipawali ki hardik shubhkamnaye sabhi rachnakaro ko aur haiku parivar ko ,

  2. सुन्दर हाइकुओं से सजी इस दीपावली पर आप सभी को हार्दिक बधाई…।

  3. बहुत सुन्दर सुन्दर हाइकु रचना.. बँधाई !!

    जलाएँ ज़रा / एक दीप कर्त्तव्य का = ८. / पथ ज्योतित ।
    {शायद एक वर्ण ज्यादा है..}


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