Posted by: डॉ. हरदीप संधु | नवम्बर 12, 2012

तेरे नाम का दीया


हरकीरत ‘हीर’

1

बाती प्रेम की

डाल,दीप जलाया

अब  न जाना ।

2

कैसे जलाऊँ

दीपक, तुझ बिन

सूनी  दिवाली  ।

3

अन्धकार है

मन के दीपक में

करो उजाला  ।

4

जलूँ  बाती -सी

हर दिवाली, प्रिय

यादों में तेरी  ।

5

जलाऊँ प्रिय

तेरे नाम का दीया

हर  दिवाली  ।

6

दूर दिखे जो

कोई बुझता दीप

करना याद  ।

7

दिखे दीप में

बस तेरा चेहरा

 प्रीतम मेरे  ।

8

डाला दीप में

तेरे नाम का तेल

जलते जाना। ।

9

दीपक रोया

जले है बाती ही क्यों

प्रेम में मेरे  ।

10

लौट के आ जा

बुझ न जाए कहीं

उम्र का दीया !

11

बुझा पड़ा है

मुहब्बत का दीया

जलाऊँ कैसे  ?

12

इस बार जो

आओ तो जला जाना

प्रेम का दीप ।

-0-

2-डॉ सरस्वती माथुर

1

आओ लक्ष्मी जी

कार्तिक की रात में

बन पूर्णिमा

2

चौरे पे दीप

रोशनी बिखराए

लक्ष्मी आए ।

3

दीप बाती भी

जुगनू -सी चमके

लौ बिखेर के  ।

4

ज्योत जलाओ

घर -घर दीपों के

मोती सजाओ  ।

5

धरा पे तम

पर किया रौशन

लक्ष्मी ने मन  ।

6

दीप शिखाएँ

चमकीले तारों- सी

जगमगाएँ

7

घर में सजी

दीपों की रंगोली

मन रौशन

-0-

3-कृष्णा वर्मा 

1

दीप शिखा ने

चीर ह्रदय तम

भरा उजाला।

2

झिलमिलाती

खुशियाँ अटारी पे

बैठ मुस्काएँ ।

3

दीप- शिखाएँ

फैलाएँ  शुभ्रता औ

चाँद लजाए।

4

किया है चूर

अमावस का दर्प

नन्हें दियों ने।

5

सर्वत्र जलें

प्रेम के दीपक तो

नित्य दीवाली।

6

दीप -शृंखला

ज्यों उतरी नभ से

तारक- लड़ी।

7

मढ़ी रंगोली

दीप करें ठिठोली

साँझ हर्षाई ।

8

आज वसुधा

रौशनी में नहाई

नील नभ सी।

9

वंदनवार

सजे रंगोली द्वार

दीप -त्योहार।

10

लक्ष्मी-गणेश

लुटाएँ  आशीष औ

हर्षें विशेष।

-0-

4-शशि पाधा

1

द्वारे- चौबारे

झिलमिल लड़ियाँ

दीपक -पर्व  ।

2

रंगोली चित्र

आँगन में अल्पना

प्रसन्न मित्र  

 3

फैला प्रकाश

खो गई अमावस

ढूँढे आकाश ।

4

तारों के दीप

अचरज से पूछें –

धरा पे कौन ?

5

चाँदी की थाली

अविरल जलती

श्रद्धा की  बाती  ।

6

 लक्ष्मी -पूजन

आरती के दीपक

पावन प्रथा  ।

7

बिखरा हास

मन में है उल्लास

दीप -उजास ।

8

पूजन -गान

उत्सव में है डूबा 

सारा जहान

 9

खील -बताशे

डलिया में सजते 

मीठे छुहारे

10

धानी चुनरी

है माँ ने भिजवाई

सगुनों- भरी ।

-0-

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Responses

  1. दीपक रोया

    जले है बाती ही क्यों

    प्रेम में मेरे ।(हरकीरत हीर जी)

    ज्योत जलाओ

    घर -घर दीपों के

    मोती सजाओ ।( सरस्वती माथुर जी)

    दीप -शृंखला

    ज्यों उतरी नभ से

    तारक- लड़ी।(कृष्णा वर्मा जी)

    तारों के दीप

    अचरज से पूछें –

    धरा पे कौन ?(शशि पाधा जी)

    आप सब को और हिन्दी हाइकु के सभी सदस्यों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ!!

  2. हरकीरत हीर जी सभी हाइकु दिल में गहरे उतर गये,बहुत बहुत बधाई ।
    सरस्वती जी,कृष्णा जी एवं शशि जी..सभी हाइकु अति सुन्दर हैं। आप सभी को दीपवली की शुभकामनाऐं ।

  3. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति !
    मनभावन हाइकू
    सभी को ज्योति पर्व की शुभकामनाएं!
    डॉ सरस्वती माथुर

  4. सभी को दीपावली की हार्दिक बधाई ….!!

  5. हिन्दी हाइकु परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

  6. जलूँ बाती -सी

    हर दिवाली, प्रिय

    यादों में तेरी ।…. बहुत सुंदर

    दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें

  7. dipawali ki hardik shubhkamnaye ..sabhi rachnakaro ke haiku bahut sundar hai , krishna ji , saraswati ji , shashi ji , hir ji sabhi ko hardik badhai

  8. सभी हाइकु अवसर के अनुकूल. सभी को बधाई और शुभकामनाएँ.


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