Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अक्टूबर 29, 2012

चाँद- उजास


शोभा रस्तोगी शोभा 

1

घूँघट हटा 

कलरव गुंजित  

लो उषा आई ।

2     

दो दिन जीना 

लौटना है फिर से

अपने घर ।

3

 स्मृतियाँ तेरी 

 विरह -रजनी में 

 जुगनू बनीं ।

 4

व्यथा मेघ से

मेह बनके आँसू

 बह निकले ।

 5

चाँद उजास 

है या प्रीत घनेरी 

धरा बताए ।

6

पूनम चाँद 

चाँदी सी बाँहे फैला 

मिला धरा से ।

7

नव कोमल

हरित घने पात 

तरु- शृंगार ।

8   

बूँद ओस की 

सजी गुलाब पर

हुई गुलाबी ।

-0-


Responses

  1. बहुत सुंदर हाइकू ! बधाई !:)
    ‘स्मृतियाँ तेरी,
    दिल के आईने में….
    झलकें सदा….’
    ~सादर !

  2. पूनम चाँद

    चाँदी सी बाँहे फैला

    मिला धरा से ।

    बहुत सुन्दर, बधाई…।

  3. सुंदर हाइकु !
    पहले और पाँचवे ने बहुत प्रभावित किया।


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