Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 14, 2012

चंचल मन


1-डॉ शिव मंगल सिंह ‘मानव’

1

चंचल मन

सब कुछ खो देता

दो ही पल में ।

2

इंसान ख़ुद

पछताता रहता

थोड़ी चूक से ।

3

पछताता है

बार-बार मानव

कालचक्र में ।

4.

पुरवइया

कारे -कारे बदरा

घन गरजे ।

5.

सावन -घटा

फुहार  धीरे- धीरे,

भीगे चुनरी ।

                                 

-0-                    

2-डॉ.आरती स्मित

1

माँ ,संकट है

संक्रमणकाल का

उद्धार करो!

2

भक्ति-प्रेम का

दिव्यालोक दो हे  माँ !

तमस् -मन में।

3

भीड़ की नदी

रेलमपेल बाढ़

त्रस्त है आत्मा !

4

आँखें खुली हैं

मगर दृष्टि बंद

सूझे ना राह ।

5

भीड़-सैलाब

अजनबी चेहरे

किसको टोके?

6

झोपड़ी पूछे-

ऊँची इमारत से

‘रोटी है कहाँ?’

7

यौवन आया

आम्र मंजरी पर

कोयल कूकी ।

–0–


Responses

  1. सभी सुन्दर अर्थपूर्ण हाइकु।

  2. सुंदर अर्थपूर्ण हाइकुओं के लिए बधाई !!

  3. सभी हाइकु बहुत अर्थपूर्ण, बधाई.

  4. इंसान ख़ुद
    पछताता रहता
    थोड़ी चूक से
    बहुत सुंदर भाव हैं

    आँखें खुली हैं
    मगर दृष्टि बंद
    सूझे ना राह ।
    कितना सच लिखा है.

    सुंदर हाइकु के लिए रचनाकारों को हार्दिक बधाई,
    सादर,
    अमिता कौंडल

  5. सुंदर गहन अभिव्यक्ति …
    चंचल मन
    सब कुछ खो देता
    दो ही पल में ।…..
    आँखें खुली हैं
    मगर दृष्टि बंद
    सूझे ना राह ।….विशेष प्रभावी…बहुत बधाई


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