Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 20, 2012

हँसा प्रभात


1-कृष्णा वर्मा

1

हँसा प्रभात

सुषुप्त कोमल -से

पल्लव जागे।

2

अरुणोदय

बह चले रश्मि के

प्राण सरस।

3

देखो सूदूर

सोई है पुरवाई

हरियाली में।

4

नवल पंख

उड़ चले रश्मि के

अलसुबह।

5

भिनसार में

टूटीं स्वप्न की साँसें

पलकें खुलीं।

6

षोडशी बाला

सजी कंचन काया

चढ़ी द्रुमों पे।

7

उषा किशोरी

सिन्दूरी आँचल ले

उतरी धरा।

 8

नूतन उषा

प्राची की खिड़की से

नित्य झाँकती।

-0-

 

2- भोर के रंग

-शशि पाधा

1

किसने थामी

झिलमिल किरण

भीत पे रंग ।

2

ओस की बूँदें

कोमल तुहिन पे

छू गई भोर ।

3

भोर नवेली

किरणों  की पालकी

चाँद कहार ।

4

सिंदूरी माँग

गुलाबी सा मुखड़ा

फूल हैरान ।

5

खोला झरोखा

खड़ा द्वार सूरज

लजाती भोर ।

6

मेहंदी रची

कोमल पदचाप

अँगना सुने ।

7

 धरा निहारे

छम-छम उतरी

आ बैठी गोद ।

8

दर्पण रूप

पल पल लजाती 

षोडशी भोर ।

9

सोई दिशाएँ

धीमे पाँव धरती

झील में छोर  ।

10

ताल तलैया

चुपचाप सुनते 

पंछी का शोर   ।

-0-

3-नटखट सूरज

-डॉ सरस्वती माथुर

1

रूह तितली

शरीर का रस पी

हवा सी उड़ी ।

2

आकाश-अंक

नटखट सूरज

धूप पटके

3

हवा थी आई

सुरभि ले फूलों की

पाखी -सी उड़ी ।

4

सुमन-सिन्धु

तैरती तितलियाँ

हवा लहरें  

5

खाली पड़े हैं

भरूँ किस रंग में

पन्ने मन के

6

यादों का चाँद

मन टहनी पर

टिका बैठा था

7

कागा बोला तो

इंतज़ार की यात्रा

शुरू हो गई ।

हिरनी- यादें

अतीत- जंगल से

भाग निकलीं ।

तारों -जड़ी थी

नीलवर्णी साड़ी भी

नभ ने ओढ़ी

१०

मन -नभ में

काली घटा -सी तैरें

भीगी -सी यादें  

-0-

 4-सफ़र में हूँ

-डॉ श्याम सुन्दर ‘दीप्ति’

1
सफ़र में हूँ
होंसला बहुत है
साथ चाहिए ।
2
सफ़र में हूँ
साथ दे सकोगे  क्या?
मंजिल नहीं।
3
सफ़र में हूँ
बतियाओ तो सही
घबराना  क्यों ?
4
सफ़र में हूँ
साथ जो मिले तेरा
छँटे अँधेरा
5
सफ़र में हूँ
अपना हाथ बढ़ा
उत्साह दिखा।
6
सफ़र में हूँ
सोचता हूँ अक्सर
चलता रहूँ
7
सफ़र में हूँ
मंजिल है आँखों में
पाँवों में राह ।
-0-

  


Responses

  1. भोर पर बहुत प्यारे हाइकु …. सफर में हूँ के साथ खूबसूरत खयाल …

  2. भोर और सूरज पर सुंदर बिंब लिए चित्रात्मक हाइकु !
    “सफ़र” कभी चिंतन तो कभी संवाद। अच्छे हाइकु हैं!

  3. आप सभी के हाइकु एक से बढ़ के एक है आप सभी कलम के धनी है
    रचना

  4. Natkhat Suraj naye bimb ke saath ukera hai Dr Saraswati mathur ji ne
    “Akaash ank
    Natkhat Suraj
    dhoop patke “……Wah Wah …Bahut Sunder laga ! “Tal Tailaya….or sabhi haiku kavitayen achchhi hain. …Shubh Mangal!
    Vimlesh

  5. भोर, आकाश, सफर … जीवन के कई पहलू. सभी हाइकु बहुत सुन्दर.

  6. जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते खूबसूरत हाइकु…सभी को बधाई…।

  7. सभी हाइकुकारों को हार्दिक बधाई |


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