Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अगस्त 15, 2012

पन्द्रह अगस्त-1


 

 1-हरकीरत ‘हीर’
1

ज़र्द -सा पत्ता
रोया है सारी रात
आँगन मेरे ।
2

चीखें भी मेरी
कटे अंगों -संग माँ
दफ़ना देना ।
3
दर्द की सुई
नज़्म  के सीने में भी
लहू टाँके है  ।
4
कैसी आज़ादी
आज़ाद नहीं जब
जन्म को नारी ।
5
नारी तुम तो हो
विमर्श का हिस्सा हो
औ’ नहीं कुछ॥
6
आज़ादी पाई
आदमी बना, पर
इंसान नहीं
7

प्यार ही लिख
तिरंगे पे अपने
जिंदगी जी ले ।
8
सोच बदल,
ज़िस्म ही धोती गंगा,
पाप न धोए  ।
-0-

2-तुहिना रंजन

1

मिला लो सुर 

देशगान में  ऐसे 

गूँजे आसमां 

 2

इन्क़लाबी वो 

देते सहज प्राण 

वीर जांबाज़   ।

 3

रण- विजयी 

चाहे जो हो भूमि 

जय भारती !!! 

 4

गर्वशालिनी 

जननी जन्मभूमि 

करो सम्मान !!

0-

3-डॉ जेन्नी शबनम

1

आई आज़ादी 

अहिंसा के पथ से

बापू का मार्ग !

2.

फूट के रोए

देख के बदहाली 

वे बलिदानी !

3.

डूब रही है 

सब मिल बचाओ

देश की नैया !

4

सोई है आत्मा 

स्वतंत्रता बाद भी 

गुलाम मन !

5

कौन जो रोके 

चिथड़ों में बँटती 

हमारी ज़मीं !

6.

वीर सिपाही 

जिनका बलिदान 

देश भुलाया !

7

देश को मिली 

भला कैसी आज़ादी ?

मन गुलाम !

8

हम आज़ाद 

तिरंगा लहराए 

सम्पूर्ण देश !

9

पंद्रहवीं तिथि 

अगस्त सैतालिस 

देश-स्वतंत्र !

10

जनता ताके 

अमन की आशा से 

देश की ओर !

11

हमारा नारा 

भारत महान का 

सुने दुनिया !

2

सौंप गए वे 

आज़ाद हिन्दुस्तान 

खुद मिट के !

13

आज़ादी संग  

ज़मीन- मन बँटे

दो टुकड़ों में !

14

मिली आज़ादी 

तिरंगा लहराया 

लाल किले पे !

15

गूँजी दिशाएँ 

वंदे मातरम से 

सम्पूर्ण देश !

16

जश्न मनाओ 

देश का त्योहार है 

आज़ादी-पर्व !

17

विस्मृत हुए 

अमर बलिदानी 

अपनों द्वारा !

18

हमको मिली 

भौगोलिक आज़ादी

मन गुलाम !

19

स्वाधीन देश 

जिनकी बदौलत

नमन उन्हें !

20

जश्न मनाओ 

सब मिल के गाओ 

आज़ादी-गीत !

-0-

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Responses

  1. ६६ वें आज़ादी पर्व पर सभी पाठकों – रचनाकारों को शुभकामनाएँ .

    देशभक्ति के रंगो में रंगे सभी हाइकु उत्कृष्ट हैं . सभी रचनाकारों को बधाई .

  2. क्या खूब…! बहुत सुन्दर हाइकु हैं…खास तौर से ये तो दिल चीर गए…|
    ज़र्द -सा पत्ता
    रोया है सारी रात
    आँगन मेरे ।

    चीखें भी मेरी
    कटे अंगों -संग माँ
    दफ़ना देना ।

    कौन जो रोके
    चिथड़ों में बँटती
    हमारी ज़मीं !

    मेरी बधाई..।

  3. इस बार आपने लिंक नहीं भेजा कम्बोज जी …..

    आज़ादी पाई
    आदमी बना, पर
    इंसान नहीं

    आज़ादी पाकर हम इंसान तो बन ही नहीं पाए हमारी मानवता तो खत्म हो चुकी है ….

    कौन जो रोके
    चिथड़ों में बँटती
    हमारी ज़मीं !

    आज़ादी तो सिर्फ अमीरों के हिस्से आई ……

    तुहिना रंजन और डॉ जेन्नी जी को बधाई ….

  4. ज़र्द -सा पत्ता
    रोया है सारी रात
    आँगन मेरे ।

    सभी हाइकू एक से बढ़कर एक … आभार इस प्रस्‍तुति के लिए

  5. सभी हाइकु सामयिक है. बहुत सही कहा…
    आज़ादी पाई
    आदमी बना, पर
    इंसान नहीं

    मिला लो सुर
    देशगान में ऐसे
    गूँजे आसमां

    हरकीरत जी और तुहिना जी को बधाई. मेरे हाइकु को यहाँ स्थान देने के लिए आभार.


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