Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जुलाई 4, 2012

वार्षिक आयोजन


 18- डॉ सुधा गुप्ता

1

पुरवा आई

फरफराए पन्ने

भीगी यादों के

2

सावनी घटा

फुहारों में कहती

यादों की कथा।

-0-

19-डॉ भगवत शरण अग्रवाल

1

भोर के साथ

महक किसकी थी

पागल मन !

2

रेत पै बस

लिखूँ मिटाऊँ नाम

और क्या करूँ ?

-0-

20-हरदीप सन्धु

1

होंठों पे गीत

पलकों पे सपने

सजाते रहो

2

छलकी हँसी

ये गगन से ज़मीं

अपनी लगी

 -0-

21-भावना कुँअर

1

दु:खी दो तट

सौतन बनी झील

मिलेंगे कब ?

2

पागल हवा

उड़ाकर ले आई

यादों के खत।

-0-

22- डॉ मिथिलेश दीक्षित

1

यादों के पंख

और ऊँचा आकाश

श्वासों का पाश।

2

बड़े विचित्र

यादों के कैमरे से

खींचे हैं चित्र।

23- डॉ उर्मिला अग्रवाल

1

यादों के फूल

खिल उठे मन में

सुरभि व्यापी ।

2

उजास फैली

भोर किरन नहीं

तेरी याद थी ।

24-कमला निखुर्पा 

1

बिन पुकारे

आएँगी दौड़ी-दौड़ी

यादें  निगोड़ी ।

2

कहीं भी जाऊँ

परछाई -सी  साथ

यादें तुम्हारी ।

25-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

1

धोना पड़े जो

कभी मन-आँगन

यादें बचाना ।

2

झील उफ़नी

जब बिसरी यादें

घिरीं बरसीं  ।

26-सतीश राज पुष्करणा

1

कल का कुआँ

वहाँ आज देखता

पानी भी बिका !

2

गाँव के बीच

दादा -सा बरगद

यादों में बसा ।

27-प्रगीत कुँअर

1

मन- परिंदा

यादों को अपने में

रखता जिंदा।

2

मन ले जाए

जहाँ मिले उसको

यादों के साए।

-0-

28-रचना श्रीवास्तव

1
आँसू से लिखी
वो चिट्ठी जब  खोली  
भीगी हथेली  ।
2

यादों के दंश
जीवित रखने को
 कुरेदे ज़ख्म ।
-0-

29-डॉ श्याम सुन्दर ‘दीप्ति’

यादों के पल
क्यों रखूँ समेट के
भीगा आँचल ।
19
याद शूल- सी
जितना सहलाती
दर्द दे जाती ।
-0-

30-सुभाष नीरव

1

महका जाती

मेरा मन-आँगन

यादें तुम्हारी।

2

मन-आँगन

खिले गुलमोहर

तेरी याद के।

31- श्याम सुन्दर अग्रवाल

1

दिल जो टूटा

बिखरा सब कुछ

बिन आवाज़ ।

2

दीपक जला

बदल तकदीर

अँधेरा चीर ।

-0-

32- डॉ सरस्वती माथुर

1
रेत की नदी
डूबते सूरज में
चमकती -सी  ।
2
काली थी रात
रोता रहा उदास
प्यासा चकोर ।
-0-

33-सारिका मुकेश

1

बासंती हवा

बाँचती रही पाती

किसी के नाम

2

अस्थिर मन

भोर की हवा जैसा

कसमसाता

-0-

34-मंजु गुप्ता

1

प्यासी धरा को 

वर्षा ने किया तृप्त 

पड़ी बौछार

2

गाँव – शहर
खूब मची है  धूम
देते बधाई ।

-0-

35-विनीता प्रवीण रीहल  ,भुज 

1

घने बादल

इतराते गुजरे 

धरा तरसे

2

सौंधी -सौंधी सी 

पी मिट्टी की सुगंध 

मेघ बरसा ।

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Responses

  1. इस विशेष अवसर पर सभी के मनभावन हाइकु पढ़कर आनंद आ गया। “हिन्दी हाइकु”, डॉ हरदीप संधु, रामेश्वर काम्बोज “हिमांशु” जी और इससे जुड़े सभी रचनाकारो को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ!

  2. ‘हिन्दी हाइकु’ को तीसरे वर्ष में प्रवेश करने पर हार्दिक बधाई…हाइकु परिवार यूँ ही समृद्ध होता रहे और बुलन्दी के सातवें आसमान पर पहुँचे…। आदरणीय काम्बोज जी, हरदीप जी और इस हाइकु परिवार के सभी सदस्यों को मेरी बधाई व शुभकामनाएँ…।

  3. सभी रचनाकारों को बधाई … सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे ॥

  4. आदरणीय रामेश्वर कम्बोज “हिमांशु” जी एवं डा० हरदीप संधु जी को
    हिन्दी हाइकु की दो वर्ष की सफल यात्रा के लिए बहुत-बहुत बधाई तथा
    तीसरे वर्ष में प्रवेश की हार्दिक शुभकामनाएं।

  5. हिन्दी हाइकु के दो वर्ष पूरे होने की हार्दिक बधाई…सफ़र निरंतर जारी रहे…सभी रचनाकारों को शुभकामनाएँ !!!

  6. ‘हिन्दी हाइकु’के सफलतापूर्वक दो वर्ष पूरे होने पर समस्त हाइकु परिवार एवं हिमांशु जी तथा हरदीप जी को विशेष रुप से बधाई।
    ईश्वर से प्रार्थना है कि आप इसे यूँ ही उन्नति के शिखर पर ले जायें।
    हाइकु सभी बहुत अच्छे लगे।
    रेनु चन्द्रा

  7. सभी हाइकु एक से बढ़ के एक … लाजवाब …

  8. हाइकु वेव की दूसरी वर्ष गाँठ पर हार्दिक बधाई. वेव पत्रिका / हजार साल चले / यही दुआएं /सुखी सानंद रहें / दोनों ही सम्पादक.
    भगवत शरण अग्रवाल

  9. हार्दिक बधाई…………………….

  10. ‘हिन्दी हाइकु’ ने अपनी दो वर्ष की यात्रा पूरी की, यह एक गर्व किये जाने वाली बात है, और इसके लिए न केवल भाई रामेश्वर काम्बोज हिमांशु जी और हरदीप कौर जी बधाई की पात्र है, बल्कि वे सभी नये पुराने रचनाकार भी बधाई के पात्र हैं जिन्होंने अच्छे और श्रेष्ठ हाइकु लेखन की इस यात्रा में अपना योगदान दिया। इस दो वर्ष की यात्रा ने यह तो सिद्ध कर ही दिया कि यदि नि:स्वार्थ और ईमानदार कोशिश की जाए और अपने ठोस तर्कों से लोगों को अच्छे लेखन के लिए प्रेरित किया जाए, तो नि:सन्देह नये लोग उत्साह से जुड़ा करते हैं और इस तरह जो काफ़िला बनता है वह बहुत दूर तक की यात्रा करता है… ‘हिन्दी हाइकु’ ने इस क्षेत्र में व्याप्त भ्रमों और धुंधलकों जिन्हें कुछ स्वार्थी और ‘अपनी ढपली, अपना राग’ अलापने वालों ने फैला रखा था, को भी काफ़ी हद तक दूर किया है।

    -सुभाष नीरव

  11. हिंदी हाइकु को हार्दिक बधाई. चयन भी अच्छा है.

  12. हिन्दी हाइकु तीसरे वर्ष में प्रवेश कर रहा है; यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता है! आप दोनों और इस अभिनव परिवार के सभी लेखक सदस्यों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं!
    सारिका मुकेश (तमिलनाडू)

  13. वार्षिक आयोजन
    “हिंदी हाइकु
    प्रगति की राह पे
    है अग्रसर” …….बधाई …. हिमांशु जी व् हरदीपजी जी को, जो साहित्य सेवा में अपना योगदान तो दे ही रहे हैं पर हाइकु विधा को भी एक नए आयाम तक खींच लाये हैं …. हार्दिक बधाई !
    डॉ सरस्वती माथुर

  14. सर्वप्रथम आदरणीय रामेश्वर कम्बोज “हिमांशु” जी एवं डा० हरदीप संधु जी को साहित्य सेवा के लिए अनंत बधाई .
    सभी की रचनाएँ एक से बढ़कर एक हैं . सभी को बधाई .
    मंजु गुप्ता
    वाशी , नवी मुम्बई .

  15. sabhi rachnakaro ko hardik shubhkamnaye ..bahut sundar prastuti

  16. पुरवा आई
    फरफराए पन्ने
    भीगी यादों के….

    haiku parivar ke sath judi yadon ke panne khol gaya ye sankalan….rang-birange foolon ke guldaste sa sundar ….
    sadar
    manju


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