Posted by: हरदीप कौर संधु | जून 29, 2012

रंग-बिरंगे सपने


सुभाष नीरव

1

रंग-बिरंगे

गुब्बारों-से सपने

छूते आकाश!

2

धारा के बीच

उतरे बिन कौन

उतरा पार!

3

बिन बोले ही

कह देता कहानी

आँख का पानी।

4

खूब नचाता

कठपुतली बना

हमें समय।

5

माँ  की गोद -सा

सुख नहीं है देता

कोई बिछौना ।

6

छुरी से ज्यादा

करें गहरे घाव

मुख के बोल।

अँधेरी रात

झींगुर चौकीदार

सीटी बजाते !

8

मन-आँगन

खिले गुलमोहर

तेरी याद के।

-0-

2-संगीता स्वरूप 

1

तुम्हारे बोल 

झुलसा ही तो गए 

मन आँगन ।

2

रोने वालों को 

मिल  जाते हैं कंधे 

तभी रोते हैं । 

3

मन के छाले 

रिसते रहे यूँ ही 

नासूर हुए ।

4

आँखों की सुर्खी 

झरते रहे आँसू 

खुश्क हुई मैं 

5

धुआँ   उठा है

सुलगता है मन 

राख़ हुई मैं ।

-0-


Responses

  1. बिन बोले ही
    कह देता कहानी
    आँख का पानी।
    गज़ब …

    रोने वालों को
    मिल जाते हैं कंधे
    तभी रोते हैं ।
    जबर्दास्त्त..

    यकीन नहीं होता कि इतने कम शब्दों में कैसे भाव पूरे हो जाते हैं.कमाल है.

  2. आँखों की सुर्खी
    झरते रहे आँसू
    खुश्क हुई मैं
    5
    धुआँ उठा है
    सुलगता है मन
    राख़ हुई मैं ।
    sangeeta ji kamal hai jharte aansu khushk hui me kitni gahri baat rakh hui sahi hai aesa hi hota hai .sabhi haiku kamal hai
    badhai
    rachana

  3. माँ की गोद -सा
    सुख नहीं है देता
    कोई बिछौना ।
    kitni sahi baat hai shayad sabhi isko sahi mante honge
    अँधेरी रात
    झींगुर चौकीदार
    सीटी बजाते !
    vah aankhon ke samne drishy utpann ho gaya

    ati sunder
    saader
    rachana

  4. रोने वालों को
    मिल जाते हैं कंधे
    तभी रोते हैं ।

    सही कहा…सभी हाइकु बहुत सुंदर !!

    अँधेरी रात
    झींगुर चौकीदार
    सीटी बजाते !

    अति सुंदर…सभी हाइकु मन को भाए !!

  5. सुभाष नीरव के हाइकु मन को बहुत भाये… यह बिम्ब तो देखते ही बनता है -‘अँधेरी रात/झींगुर चौकीदार/सीटी बजाता…’

  6. बिन बोले ही
    कह देता कहानी
    आँख का पानी।
    सच है!
    @सुभाष जी, सभी हाइकु सुन्दर!

    मन के छाले
    रिसते रहे यूँ ही
    नासूर हुए ।
    दर्द समग्रता में अभिव्यक्त हो गया!
    बहुत सुन्दर, संगीता जी!

  7. बड़े सुन्दर हाइकु हैं…। सुभाष जी के ये हाइकु तो बहुत भाए:
    बिन बोले ही
    कह देता कहानी
    आँख का पानी।

    अँधेरी रात
    झींगुर चौकीदार
    सीटी बजाते !

    संगीता जी का हाइकु:
    तुम्हारे बोल
    झुलसा ही तो गए
    मन आँगन ।
    बहुत अच्छा लगा ।

    दोनो को मेरी बधाई…।

  8. बिन बोले ही

    कह देता कहानी

    आँख का पानी।

    सुभाष जी के बहुत सटीक और सुंदर हाइकु

  9. सुभाष जी के सभी हाइकु गहरे भाव-बोध लिए हुए हैं. संगीता जी के हाइकु भी अच्छे हैं.

  10. मन-आँगन
    खिले गुलमोहर
    तेरी याद के।

    Bahut khub ! bahut2 badhai..

    तुम्हारे बोल
    झुलसा ही तो गए
    मन आँगन ।

    ye haiku achchha hai..aapko bhi badhai…

  11. सुभाष नीरव भाई के बहुत खूबसूरत हाइकु पढ़े ।कमाल की लेखनी हर विधा पर ।बधाई सुभाष भाई ।संगीता जी को हार्दिक बधाई सुंदर हाइकु के लिए ।

  12. छुरी से ज्यादा
    करें गहरे घाव
    मुख के बोल।

    अँधेरी रात
    झींगुर चौकीदार
    सीटी बजाते !
    अनोख़े बिम्बों वाले मनभावन हाइकु । बधाई नीरव भाई ।

    रोने वालों को
    मिल जाते हैं कंधे
    तभी रोते हैं ।
    संगीता जी दर्दभरे सुन्दर हाइकु के लिये बधाई ।
    सनेह विभा रश्मि


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