Posted by: हरदीप कौर संधु | जून 19, 2012

कचनार


डॉ• भावना कुँअर

1

पाँच पाँखुरी


लगे पंचतत्त्व–सी

कचनार की।

2

भरती रंग

स्वर्णमयी किरणें

कचनार में।

3

सजे आँगन

कचनार फूलों से

देहरी झूमे।

4

हर मन में

कचनार को देख

उमड़ा प्यार।

5

चाँदी उतरी

कचनार–रूप में

चमचमाती।

6

बातें करते

कचनार के फूल

नहीं थकते।

7

राह निहारें

बैठे खिड़की पर

ये कचनार ।

8

मुस्कुरा उठीं

कचनार–कलियाँ

देख के धूप ।

 

9

सजने लगी

मंदिर की मूरत

कचनार से ।

10

मंदिर–सीढ़ी

चढ़ने को आतुर

ये कचनार।

11

नहा रही है

कचनार–गंध से

आज चाँदनी।

12

पहली धूप

कचनार का तन

गुदगुदाए ।

13

कोयल गाए,

महके कचनार,

झूमे बयार ।

14

दुपहरी में

खिले ये कचनार

शिशु–समान ।

15

सजने लगे

ये वन–उपवन

कचनार से ।

16

सजे हैं द्वार

कचनार–फूलों से

बंदनवार।

17

वृक्ष के तले

कचनार के फूल

बिछौना बने ।

-0-

( सभी चित्र गूगल से साभार )


Responses

  1. कचनार पर सुंदर हाइकु

  2. मन पुलकित हो गया कचनार पर हाइकु पढकर। सुंदर चित्रों ने भी बहुत आकर्षित किया।
    ११,१२,१३,१४ और १७ नंबर वाले हाइकु बहुत प्रभावी बन पड़े हैं।

  3. कचनार पर इतने सुन्दर हाइकु पढ़ कर मन पुलकित हो गया…बधाई…।

  4. कचनार की सुगंध हमारे मन आँगन को भी सुवासित कर गई…बहुत खूब…हाइकु भी, चित्र भी…बहुत बहुत बधाई|

  5. सभी हाइकु मनभावन और मोहक. शुभकामनाएँ.

  6. कचनार की पाँच पंखुरी..,सजे आँगन..बातें करते..,राह निहारे..नहा रही और सभी सचित्र मन को बहुत भा गये। बहुत बधाई।…रेनु चन्द्रा

  7. भाव पूर्ण सुंदर हाइकु ने जग क आ आँगन महका दिया
    बधाई .

  8. सभी हाइकु बहुत सुन्दर कचनार के विविध रंग लिए हुए .

  9. हाइकु पढ़े।मन कचनार सा खिल गया शुभकामनाएँ ।

  10. अति सुन्दर ..कचनार के फूलों सा रंगीन हो गया हाइकू का पेज ..इन सुन्दर हाइकू से

  11. Aap sabka bahut2 aabhaar..or kaamboj ji aapka bhi tahe dil se aabhaar itne rang bhar diye aapne in haikuon men ki ye gulaabi rang paakar or bhi jyada muskarane lage hain…

  12. दुपहरी में
    खिले ये कचनार
    शिशु–समान । वाह क्या उपमा है … पढकर मन उपवन बन गया ..

  13. भावना जी ! कचनार के माध्य से आपने धरा का सारा सौन्दर्य उडेल दिया । विविधवर्णी सौन्दर्य को प्रतिबिम्बित करने के लिए आपका शब्द-चयन सराहनीय है । प्रकृति के इस अनुपम सौन्दर्य को किसी लघुछन्द में बाँधना सचमुच हुनौती है और आपने उस चुनौती को स्वीकार कर सफल प्रस्तुति दी है । बहुत बधाई!!

  14. मन्दिर सीढ़ी चढ़ने को आतुर …..वाह बहुत सुंदर

  15. बहुत सुन्दर – कोमल अभिव्यक्ति है आपकी…सभी हाइकु बहुत प्रभावी हैं…बधाई…!


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