Posted by: हरदीप कौर संधु | मई 29, 2012

आकाश -तले


तु‘हिना’ रंजन 

                 

              1.

अम्बर- धरा 

मिलें क्षितिज पर 

फिर भी जुदा  ।

 2.

नीले नभ में 

रंगबिरंगी पतंगें 

दिल लुभाएँ । 

 3.

आकाश -तले 

धरती झूम उठे 

घन बरसे ।

 4. 

रो पड़ा नभ 

देखी उसने जब 

सूखी धरती ॥

-0-


 


Responses

  1. बहुत अच्छे हाइकु हैं।
    रेनु चन्द्रा

  2. शाश्वत सत्य…

    अम्बर- धरा
    मिलें क्षितिज पर
    फिर भी जुदा ।

    सभी हाइकु बहुत सुन्दर, बधाई.

  3. Tuhina ji,

    swagat hai apka hindi haiku parivar me… bahut sundar haiku hain… badhai ho
    sadar
    manju

  4. अम्बर- धरा
    मिलें क्षितिज पर
    फिर भी जुदा ।
    बहुत सुन्दर हाइकु…बधाई हो।

  5. Bahut achchhe haiku hain…bahut2 badhai..

  6. सभी हाइकु बहुत सुंदर…अम्बर -धरा…वाह !
    तुहिना जी को बधाई !!

  7. आकाश -सी व्यापकता लिए सुंदर हाइकु
    बधाई

  8. सुंदर हाइकु। इस हाइकु ने बहुत प्रभावित किया –

    “अम्बर- धरा
    मिलें क्षितिज पर
    फिर भी जुदा ।”

  9. aap sabhi ka protsaahan paakar main abhibhhot huun.. agar meri rachna ne aapke hriday ko sparsh kiya toh meri lekhni safal ho gayi.. 🙂

  10. नीले नभ में
    रंगबिरंगी पतंगें
    दिल लुभाएँ
    सुंदर हाइकु… बधाई!


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