Posted by: हरदीप कौर संधु | मई 12, 2012

तुम्हें पाया है


सुशीला शिवराण

1

कजरा नैन

मृगी -सी चितवन

छला है जग 

2

हरित दूर्वा

क्यारी-क्यारी कुसुम

मन प्रसून !

3

                            

हरे गलीचे

ने हरा वितान

मुदित धरा !

4

सीत बयार

रूत भीगी-भीगी सी

मन पपीहा !

5

मेह बरसा

बचपन चहका

मन किलका !

6

बाग हिंडोला

हौले से दिल बोला-

आ भी जा पिया !

7

खुद को खोया

तब तुम्हें पाया है

प्रीत की रीत !

8

धागे प्रीत के
कच्चे हैं मानें सब
बंधन पक्के ।


9
भीगी पलकें
बिखरी हैं अलकें
सूना मनवा !


10
गाए मनवा
ज़मीं पे नहीं पैर
हुआ है प्यार !

-0-


Responses

  1. बहुत सुंदर ….
    मन भवन हाइकू …!

  2. सभी हाइकु अपनी बात कहने में सक्षम …. बहुत बढ़िया …

  3. सीत बयार
    रूत भीगी-भीगी सी
    मन पपीहा !———–लाजवाब

    सुंदर हाइकु

  4. सुंदर

  5. Khubsurat haiku…

  6. सभी हाइकु बहुत सुन्दर, बधाई सुशीला जी.


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