Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 8, 2012

प्रार्थना


हरे राम समीप 

1

1-जीवन-

नया स्वाँग ले

दुख बहुरुपिया

रोज आ जाए ।

2-परिस्थिति

पहाड़ भर

हो गईं ये मुश्किलें

राई भर मैं ।

3-समस्या

सागर नीचे

ठिकाना खोज रही

थकी चिड़िया ।

                 

 4-सृजन-क्षण

चाक पे  रक्खे

गीली मिट्टी सोचूँ मैं

ढ़ूँ आज क्या ?

5-कामना

बस ये चाहूँ

बहें सदा आँखों से

तेरे ही दु:ख ।

6-जमावड़ा

कौन पता दे

हर दुखियारे को

मेरे दिल का ।

7-हमदर्द

दुखिया साथी

न दे ज्यादा सफाई

मैं तुझे जानूँ

8-प्रार्थना

हे प्रभु !आज

मेरे घर फाक़े हैं

कोई न आए !

9-फुटपथिये

भूख के मारे

रोटी की चर्चा कर

रात गुजारें ।

10-किसान हैरान

पड़ा अकाल

पहाड़ जैसा खड़ा

सामने साल

11-हालात

हलकान है

अकाल में चिड़िया

दाना न पानी ।

-0-


Responses

  1. सभी हाइकु बहुत अच्छे।

  2. वाह..
    जल के ऊपर
    नभ में पंछी
    और चाह
    दाना रोटी

  3. जीवन के यथार्थ से जुड़े सभी हाइकु गहन

  4. रामेश्वर जी… वैसे तो सदा ही आपका चुनाव श्रेष्ठ होता है…लेकिन समीप जी के ये हाइकू सिर्फ हाइकू नहीं… हिंदी हाइकू विधा के दुर्लभ नगीने हैं..न राई भर कम न राई भर जादा… एक एक शब्द नाप तौल कर…

    आकाश भर
    हो गयीं ये मुश्किलें
    राई भर मैं //

    चाक पे रक्खे
    गीली मिट्टी सोचूँ मैं
    गढ़ूँ आज क्या ?

    भूख के मारे
    रोटी की चर्चा कर
    रात गुजारें

    बहुत दिनों के बाद कुछ अद्भुत पढ़ने को मिला…बहुत बहुत आभार आपका .

    सादर
    मंजु

  5. मंजु जी बातों से शत प्रतिशत सहमत हूँ…गहन सार्थक और सारगर्भित हाइकु पढ़वाने कर लिए आभार !!!

  6. हे प्रभु !आज
    मेरे घर फाक़े हैं
    कोई न आए !…….सभी हाइकु बहुत सुंदर और गहन अर्थ लिए हुए है……..सादर

  7. सत्य के धरातल पर अनुभवों का निचोड़ शब्दों का दुशाला ओढ़े आरूढ हुआ है! बहुत ही गहन और सार्गर्भित हाइकु ! बधाई!

  8. सभी हाइकु अच्छे हैं. ये हाइकु अपने समय के यथार्थ को बेपर्दा करते हुए समकालीन कविता के बराबर खड़े नज़र आते हैं-
    हे प्रभु! आज
    मेरे घर फाक़े हैं
    कोई न आए !
    ——-
    भूख के मारे
    रोटी की चर्चा कर
    रात गुजारें ।
    ———–
    पड़ा अकाल
    पहाड़ जैसा खड़ा
    सामने साल ।
    ——-
    हलकान है
    अकाल में चिडि़या
    दाना न पानी ।
    …….यह हिंदी में हाइकु की व्यापकता को रेखांकित करने वाली बात है. सामान्यतया हाइकु बिना शीर्षक के लिखे जा रहे हैं, समीप जी ने इससे हटकर अपने हाइकु को शीर्षक दिए ही नहीं है, सटीक शीर्षक दिए हैं. पता नहीं हाइकु-चिंतन से जुड़े वरिष्ठ जन इससे कितना सहमत होंगे, पर मैं इसे समीप जी की सामर्थ्य मानूंगा और हाइकु के समर्थन में एक अच्छा संकेत! आपने उन्हें इस मंच पर लाकर बहुत अच्छा किया, हार्दिक बधाई!

  9. सहज शब्दों में इतने अद्भुत भाव वाले अप्रतिम हाइकु हम तक पहुँचाने के लिए हार्दिक आभार .

  10. समीप जी ,के सभी हाइकु अर्थ की गहनता से परिपूर्ण हैं ..निश्चित ही रचनाकार लाभान्वित होंगे ….
    हिमांशु जी, हार्दिक आभार ! सशक्त हाइकु रचनाकार से परिचय करवाने के लिए……

  11. इतने खूबसूरत और सारगर्भित हाइकु हमारे सामने लाने के लिए बहुत आभार…और समीप जी को बधाई…।

  12. वाह, बहुत ही खूबसूरत हाइकु

  13. अर्थपूर्ण हाइकु । सभी रचनाकारों के लिए नई दिशा ।

  14. वाह सर बहुत ही सुंदर हाइकु हार्दिक बधाई |

  15. सारगर्भित सुन्दर हाइकु

  16. सभी हाइकु जीवन के करीब, बेहद अर्थपूर्ण, बधाई.

  17. bahut khub!


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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