Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 26, 2012

मन -बंजारा


1-भावना सक्सेना

1

मन -बंजारा

भटके हर दिन

खोज खुशी की ।

2

शांत सड़क

खोयी -सी, ऊँची-नीची

जीवन सम ।

3

राही  चलते

सड़क रह जाती

यही संसार ।

4

मन के पाखी

उड़ें अनियंत्रित

तन में कैद ।

5

धूप साँझ की

सींचती अन्तर्मन

यादें जीवन ।

6

आज का दिन

भरपूर खुशी थी

गुज़र गया।

7

कल आएगा

लेकर नव प्रात

धरो विश्वास

-0-

2-त्रिलोक सिंह ठकुरेला


     1

 दौड़ाती रही
आशाओं की कस्तूरी
जीवन भर  

2
नयी भोर ने
पंख फड़फड़ाए
जागीं आशाएँ  ।
3

देकर प्रेम
उसने पिला दिया
अमृत घूँट ।

4

थका किसान
उतर आई साँझ
सहारा देने

5
तितली उड़ीं
बालमन में सजे
सपने    कई
-0-

Advertisements

Responses

  1. राही चलते

    सड़क रह जाती

    यही संसार ।

    सभी हाइकु सुंदर ….. भावना जी और त्रिलोक सिंह जी को बधाई

  2. मन -बंजारा
    भटके हर दिन
    खोज खुशी की

    sach hai… ham sab banjare se khushi ki khoj me hi to bhatak rahe hain…

  3. 1मन -बंजाराभटके हर दिनखोज खुशी की
    2दौड़ाती रही
    आशाओं की कस्तूरी
    जीवन भर
    sabhi haiku bahut sundar.

  4. ,ताज़गी से भरे हुए हाइकु!…

  5. भावन जी और त्रिलोक जी को सुन्दर हाइकुओं के लिए बधाई

  6. जीवन दर्शन को मन में समेटे सुन्दर हाइकु….
    मन -बंजारा
    भटके हर दिन
    खोज खुशी की । …और
    दौड़ाती रही
    आशाओं की कस्तूरी
    जीवन भर ।…..बहुत सुन्दर लगे …बहुत बधाई…!

  7. थका किसान
    उतर आई साँझ
    सहारा देने ।

    कितना सुंदर बिम्ब है ऐसा ही लगता है साँझ थम के हाथ घर तक पहुंचती है .

    रचना

  8. मन के पाखी
    उड़ें अनियंत्रित
    तन में कैद ।

    मन से ज्यादा गतिमान कोई नहीं है पर कैद तो तन में ही है बहुत सुंदर सोच

    बधाई

    रचना

  9. मन -बंजारा
    भटके हर दिन
    खोज खुशी की ।

    बहुत सुंदर…बधाई|

    तितली उड़ीं
    बाल -मन में सजे
    सपने कई

    बाल मन को बताता यह हाइकु बहुत सुंदर बन पड़ा है…बधाई|

  10. बहुत अच्छा है।

  11. थका किसान
    उतर आई साँझ
    सहारा देने ।
    नयी भोर ने
    पंख फड़फड़ाए
    जागीं आशाएँ ।
    उत्कृष्ट हाइकु …पढते ही मन में सुदर बिंब उभरते हैं .सार्थक लेखन के लिए.बधाई …

  12. prbhavit haiku hain sabhi …bahut2 badhai…

  13. सुन्दर सार्थक हाइकु के लिए भावना जी और त्रिलोक जी को बधाई.

  14. सभी हाइकु बहुत सुंदर हैं। भावना सक्‍सेना जी के इस हाइकु ने बहुत प्रभावित किया –
    “मन के पाखी
    उड़ें अनियंत्रित
    तन में कैद ।”

    त्रिलोक सिंह ठकुरेला जी ने हाइकु में बहुत ही सुंदर बिंब प्रस्तुत किए हैं। पहले, दूसरे और चौथे हाइकु बहुत मोहक हैं। बधाई !


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: