Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 24, 2012

मेरे जज़्बात


हिंदी हाइकु परिवार के लिए वरिन्दरजीत सिंह बराड़ एक नया नाम होगा |आपने  पहली बार हाइकु लिखकर हिंदी साहित्य से लिखने का नाता जोड़ा है| यह हाइकु यादों का आईना पोस्ट से मुतअस्सिर ( प्रभावित) हो कर लिखे गए हैं  | इन हाइकु में कुछ सवाल उभरकर सामने आए हैं , जिनका जवाब देने का मैंने प्रयास किया है यह सोचकर कि इससे पहली बार लिखने वाले का उत्साह बढ़ेगा | आशा करती हूँ कि उनका ये प्रयास आप सबको अच्छा लगेगा | 

 1.

सुलगे आज                         

मेरे सीने में आग 

बताऊँ किसे  …….वरिन्दरजीत

भावों का ताप

शब्दों में ढलकर 

बना ख़िताब   ……..हरदीप 

 2.

कट रहा क्या 

यूँ मेरे अंदर से 

मुझे न पता ……...वरिन्दरजीत

 मचले भाव 

तेरे मन में आज 

हुआ बेहाल ……..हरदीप 

3.

ये दिल कटा        

या थे मेरे जज़्बात

कभी न जाना …….वरिन्दरजीत

दिल में तेरे 

उमड़े ये जज़्बात

खोल दे द्वार ……….हरदीप 

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Responses

  1. wah…nice….

  2. nice….

  3. जुगलबंदी बहुत भावपूर्ण बन गई है |वरिन्द्र्जीत जी और हरदीप जी को बहुत -बहुत बधाई ….जुगलबंदी चालू रखिए…..

  4. वरिन्द्रजीत जी के हाइकु तो अच्छे हैं ही, हरदीप जी, आपकी जुगलबन्दी ने चार चाँद लगा दिए…। आप दोनो को बधाई…।
    ‘हिन्दी हाइकु’ में ये जुगलबन्दी की जो शुरुआत हुई है, ये तो हाइकु के आनन्द को उम्मीद से दुगुना कर देता है…आभार…।

  5. nice…………..आप दोनो को बधाई…।

  6. अति सुन्दर है ये जज़्बात

  7. गागर में सागर है !

  8. हरदीप जी,
    आपने वरिन्द्रजीत सिंह बरार जी के हाइकु मय जज़्बात भरे ख्यालों का
    बहुत ही उम्दा एवं तज़ुरवा भरा हाइकु मय सलाह प्रस्तुत किया है|
    यह जुगलबन्दी वाकइ एक नया प्रयोग है|
    इसे जुगलहाइकुबन्दी भी कहा जा सकता है|

  9. बहुत भावपूर्ण हाइकु आप दोनों के…आप दोनों को बधाई|

  10. बहुत भावपूर्ण हाइकु आप दोनों के…आप दोनों को बधाई|

  11. वरिन्द्रजीत बरार जी आपका स्वागत है । हम आशा करते हैं कि आप हिन्दी हाइकु से जुड़े रहेंगे और आने वाले समय में अपने भावों और विचारों को हम सबके साथ साझा करेंगे ।

  12. मुझे यह बताने में बहुत खुशी हो रही है कि आप सभी के प्रोत्साहन से कल की (24 अप्रैल ) पोस्ट 194 लोगों ने देखी । अब ट्यूनिशिया Tunisia विश्व का 64 वाँ देश 24 अप्रैल को हिन्दी हाइकु तक पहुँचा । कल तक हिन्दी हाइकु पर 161 कवियों के 3399 हाइकु हो चुके है अब तक की कुल पोस्ट 361 ,अब तक के कुल दर्शक 35577 ,कुल विशिष्ट दर्शक 7765 हो गए । नए वर्ष में 18 नए देश जुड़े ,33 नए रचनाकार भी जुड़े । इसका श्रेय जाता है केवल अच्छा लिखने वालों को , अच्छा सोचने वालों को और सबके प्रति स्नेह और सम्मान का भाव रखने वालों को ।यही हम सबकी, हिन्दी हाइकु की और इसके रचनाकारों की शक्ति है ।रचनाकार, हिन्दी चेतना , गर्भनाल, उदन्ती ,अनुभूति ,वीणा , सादर इण्डिया, लोक-गंगा , आरोह अवरोह, सद्भावना दर्पण , हिन्दी टाइम्स , हिन्दी गौरव ,लेखनी डॉट नेट,अविराम , अप्रतिम आदि नेट और प्रिण्ट मीडिया की पत्रिकाओं और हर्मन रेडियो ने भी इस विधा को प्रोत्साहित किया है

  13. bahut khub ! dono ko badhai…

  14. बहुत बढ़िया जुगल बंदी … सुंदर हाइकु

  15. Very nice

  16. हाइकु विधा में इतनी प्यारी जुगलबंदी … हरदीपजी आपने वरिन्द्रजीत सिंह बरार जी के भावों को सुन्दर विस्तार दिया है … हिंदी हाइकू की सच्ची सहेली हैं आप …अब आपके लिए एक हाइकु …(हाइकु कहे …हरदीप है मेरी ….सच्ची सहेली )

  17. हरदीप बहन के प्रोत्साहन से मैं भी हिन्दी हाइकु परिवार में शामिल हो गया |
    आप सभी दोस्तों ने मेरे हाइकु पसंद किए, सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद|
    आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अमूल्य हैं |
    मैं आप सब के प्यार तथा प्रोत्साहन के लिए आभारी हूँ |
    वरिन्द्रजीत


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