Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 20, 2012

यादों का आईना


जब कोई हमसे बहुत दूर चला जाता है तो उसकी याद हमारे जीने का सहारा बन जाती है | मेरे पूजनीय पिता जी को हमसे बिछुड़े लगभग २० वर्ष हो गए हैं | आज जब सुबह केलेंडर देखा  जो २० अप्रैल दिखा रहा था , उस पर नज़र जाते ही  यादों के आईने में किसी की तस्वीर दिखने लगी …..वो थे मेरे पिता जी …….जिनका आज जन्म दिन है | पूजनीय पिता जी की स्मृति में कुछ हाइकु………..

1.

कौन कहता 

साथ तुम नहीं हो                       

तुम यहीं हो

2.

तोतले दिन 

जिस संग बिताए                    

यादों में आए

3.

यादों में आना 

पीठ थपथपाना 

लगे सुहाना 

4.

चले गए यूँ 

कोसों दूर हमसे 

यादों में मिलें 

5.

याद उनकी 

हर पल है आती 

बड़ा रुलाती 

6.

याद तुम्हारी 

थामती भंवर में 

नाव जो डोले 

–डॉ. हरदीप कौर सन्धु

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Responses

  1. स्मृतियों की गहनता शब्दों की ऊष्मा और भावों की तरलता सब मिलकर हाइकु को जीवन्त कर दिया है । भावपूर्ण रचना के लिए हार्दिक बधाई ! इस सिलसिले को आगे बढ़ाया जाए तो और भी हाइकु पढ़ने को मिल जाएँगे ।

  2. bahut hi sunder …sabhi ne dil ka haal bata diya ….hardik badhai

  3. कौन कहता
    साथ तुम नहीं हो
    तुम यहीं हो

    जब कोई अपना हमसे बिछड़ जाता है तो बरसों बीत जाने पर भी मन को उसके अपने आसपास होने का अहसास होता है…। बहुत अच्छे हाइकु हैं, मेरी बधाई…।

  4. हाइकु के रूप में पिता को सच्ची श्रद्धांजलि …सुंदर भाव पूर्ण हाइकु

  5. बहुत भावपूर्ण हाइकु…बधाई।

  6. बहुत सुंदर यादों का आइना हरदीप जी…बहुत भावपूर्ण

    माता पिता की यादें होती ही ऐसी हैं कि उनकी गठरी बनाये हृदय में छुपाये पूरा जीवन बीत जाता है… लेकिन वो सदा साफ शफ्फाक आईने सी चमकती रहती हैं.. उनकी गर्मी, उनकी चमक ज़रा भी धुंधली नहीं पड़ती….

  7. भावपूर्ण हाइकु

  8. Bahut hi khoob likha hai
    Deed, your father must be proud on yourself

  9. याद तुम्हारी
    थामती भंवर में
    नाव जो डोले।
    …बेहतरीन। सुंदर हाइकू। सुंदर शब्दांजलि।

  10. सुन्दर हाइकु…

  11. प्रिता की स्मृति में लिखे आपके ये हाइकु बहुत सुन्दर हैं, कोमल भावनाओं से भरे और सच्चे ! अपनों की स्मृतियां हमें अच्छा ही लिखने के लिए प्रेरित किया करती हैं… आपके हाइकु पढ़कर मुझे भी अपने माता-पिता स्मरण हो आए।

  12. भावपूर्ण हाइकु…यादें ही जीने का सहारा बनती हैं.

  13. पिता की स्मृतियों को भावभीनी बुनावट के साथ समेटते हाइकु.

  14. मैं सबसे पहले सभी दोस्तों का तहे दिल से शुक्रिया करना चाहती हूँ | लेखक बनने से पहले जरूरी है पाठक बनना ……’अगर कोई अच्छा पाठक बन गया तो कुछ न कुछ लिखना तो आ ही जाता है | आपने मेरे हाइकु की रूह तक पहुँच कर उनको समझा है |
    हाइकु जाना
    रूह को पहचाना
    हाइकु पाना
    यह हिन्दी हाइकु वेब पत्रिका आप सब के सहयोग से दिन दुगुनी रात चौगुनी तरक्की कर रही है | आप सब का एक बार फिर से धन्यवाद !
    हरदीप

  15. आज आपके हाइकू
    मुझे पढ़ते-पढ़ते रूला गए
    मुझे अपने पिता की याद दिला गए….

    सभी हाइकू पिता के स्नेह की ऊष्मा से भरे हैं….
    हार्दिक बधाई और धन्यवाद!
    सादर/सप्रेम
    सारिका मुकेश

  16. sunder yad kee.badhaaee

  17. कौन कहता
    साथ तुम नहीं हो
    तुम यहीं हो
    सच है इस जीवन सफ़र में बहुत अपने छोड़ कर चले जाते हैं. पर स्मृतियों में हमेशा पास होते हैं…….बहुत सुंदर हैकु हैं……
    सादर,
    अमिता कौंडल

  18. बहन किसी के जाने का दर्द में बहुत अच्छी तरह समझती हूँ .जब भी कोई अपना दर्द साझा करता है मै बहुत कुछ याद करने लगती हूँ आपके पिता जी जहाँ भी होंगे आप पर गर्व करते होंगे .
    आपने बहुत सुंदर लिखा है .कुछ मेरी तरफ से भी
    एक पत्ता था
    टूटा जब डाल से
    जुड़ न सका
    -०-
    उस लोक का
    होता पता कोई तो
    भेजती स्नेह
    -०-
    तुम्हारी याद
    एक बंद खजाना
    दिल में मेरे
    -०-
    स्मृति की डाल
    सहलाती दर्द को
    बहते अश्रु
    -०
    तारीख कोई
    कभी कोई गीत भी
    दिलाता याद
    -०-
    ताखे निशानी
    खूंटी पे टंगी याद
    रुलाती मुझे
    -०-
    यादों की नाव
    हर वख्त तैरती
    दिल दरिया
    -०-

  19. Bahut bhavpurn…kuch yaaden hi rah jaati hain hamare jeevan men jinke sahare ham apna baaki jeevn ji jaate hain…

  20. dr. Amarjit singh (fufad ji) di yaad ch likhe haiku yaadan taja kar gaye. ohna di photo dekh deyan main soch rahi si…..oh kadon de chale gaye ne, par ohna layi pyaar te satikar hale tak v sade dilan vich jinda hai.

    devinder sidhu

  21. पिता का चले जाना बहुत दुःख देता है. आपके हाइकु से मुझे भी अपने पिता याद आ गए. सभी हाइकु मन के बहुत करीब लगे. बस स्मृतियाँ ही हमारे पास है…

    चले गए यूँ
    कोसों दूर हमसे
    यादों में मिलें

    याद उनकी
    हर पल है आती
    बड़ा रुलाती

    पिता जी को श्रद्धांजलि. शुभकामनाएँ.


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