Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | फ़रवरी 28, 2012

चुने हुए हाइकु -4


डॉ कमल किशोर गोयनका

1

चमक गई

तुम्हारी स्मृति आज

फुलझड़ीसी

2

फागुनी नभ

बिचरती कोयल

बुनती गीत

3

पिंघल बही

घाटी मे  कलकल

पर्वतकथा !

-0-

कुसुम गोयनका

1

तपती धरा

चली गई बदली

बिन बरसे ।

-0-

के जी बालकृष्ण पिल्लै

1

‘आँखें खोलो तो’

‘तो क्या मिलेगा मुझे’

‘थोड़ा उजाला’

-0-

सदी के प्रथम दशक का हिन्दी हाइकु –काव्य

सम्पादक  :डॉ मिथिलेश दीक्षित से साभार


Responses

  1. kusum ji ,kamal kishor ji ,balkrishn ji
    aapsabhi ne bahut sunder haiku likhe hain .bhavon ko shabdon me yun likhna asan nahi hai
    bahut bahut badhai
    rachana

  2. सभी हाईकु बहुत अच्छे लगे……शुभकामनाएं।


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

श्रेणी

%d bloggers like this: