Posted by: हरदीप कौर संधु | फ़रवरी 20, 2012

वसन्त


सीमा स्मृति

प्रसन्न  मन

 प्रफुल्लित है  तन,

आया वसन्त  ।

 2

मन के तार

 बिना साज के राग   

 छाया वसन्त

3

महके फूल

तितली चूमे होंठ

भँवरे गाएँ ।

धुन बजती  

थिरकते कदम 

झूमे है धरा 

-0-


Responses

  1. मन के तार
    बिना साज के राग
    छाया वसन्त

    sach kaha seema ji… yahi to rituraj vasant kii visheshta hai…

  2. मन के तार
    बिना साज के राग
    छाया वसन्त

    बहुत अच्छी लगीं सभी हाइकु रचनाएँ

  3. मन के तार
    बिना साज के राग
    छाया वसन्त
    kya sunder vasant ka aagaz hai badhai seema ji,
    saadar,
    amita kaundal

  4. bahut sundar haiku

  5. मन के तार
    बिना साज के राग
    छाया वसन्त

    bahut sunder haiku hai…badhai.

  6. सभी बहुत अच्छे है …….१,२.४ बहुत पसंद आये ……..बधाई .


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