Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जनवरी 20, 2012

चाँदनी रात


उर्मि चक्रवर्ती
1
चाँदनी रात,
महकी हुई फिज़ा,
रोशनी छायी !
2
प्रतिबिम्ब- सा,
अद्भुत  है  नज़ारा,
खोए  नयन !
3
प्रकाश छाये,
अँधेरा उज्ज्वल हो,
करूँ प्रतीक्षा !
4
जीवन मेरा,
तुझ बिन अधूरा,
तन्हा-सा लगे !
5
देखूँ चाँद को,
रात गुज़र जाये,
खालीपन-सी !
6
सोचती रही-
बाहें फैलाये तुम,
कब आओगे !
7
गहरे पल,
ख़्वाब अधूरा रहा,
नशा-सा लगे !
8
चाँद का रूप

तलाशती अँखियाँ,

बरस पड़ीं।
-0-


Responses

  1. भावपूर्ण हाइकुओं के लिए उर्मि जी को बहुत बहुत बधाई|

  2. चांदनी रात में साथ की तलाश … सारे हाईकू बहुत सुन्दर …

  3. सभी भावपूर्ण हाईकु…शुभकामनाएं।

  4. सारे हाईकू बहुत सुन्दर …बहुत बहुत बधाई|


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