Posted by: हरदीप कौर संधु | जनवरी 19, 2012

गगन-सर


डॉ0क्रान्तिकुमार ,पूणे

1

भ्रष्ट आचार

मुक्ति -हेतु प्रयास

हो इस बार

2

राजनीति से

लुप्त राज .औ नीति

बची अनीत ।

                                 3

छाया:रोहित काम्बोज


बिटिया प्यारी

सबके मन भाई

मधु -मुस्कान ।

4

शीत का प्रात

सूरज की प्रतीक्षा

करते  गात ।

5

शरद-रात्रि

खरगोश चाँदनी

उछली -फैली ।

6

गगन-सर

है तैर रहा चाँद

नौका -विहार ।

7

नूतन वर्ष

नव-आशा-संकल्प

स्वागत हर्ष।

0-

राजेन्द्र परदेसी, लखनऊ

1

पत्थर टूटा

लुढ़क कर बना

आस्था का केंद्र

2

टूटी झोपड़ी

समतल जमीन

खड़ा महल ।

3

कूकती कोकी

नदी के एक तीर

कोक अधीर ।

-0-


Responses

  1. टूटी झोपड़ी
    समतल जमीन
    खड़ा महल ।

    बहुत सुन्दर …

  2. राजनीति से
    लुप्त राज .औ नीति
    बची अनीत ।
    सच्ची बात…।

    टूटी झोपड़ी
    समतल जमीन
    खड़ा महल ।
    पैसे के बल पर यूँ ही होता आया है और होता रहेगा…।

  3. राजनीति से
    लुप्त राज .औ नीति
    बची अनीत ।

    टूटी झोपड़ी
    समतल जमीन
    खड़ा महल ।
    बहुत अच्छे हाईकु


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