Posted by: हरदीप कौर संधु | दिसम्बर 4, 2011

हाइकु आयोजन-1


आज डॉ सत्यभूषण वर्मा जी का जन्म दिन है ।‘हिन्दी हाइकु ने आज एक विशेष आयोजन किया है। आज के अंक में

वरिष्ठ कवयित्री डॉ सुधा गुप्ता जी का लघुलेख ,

28 हाइकुकारों के चुने हुए 143हाइकु और दस्तावेज़ के अन्तर्गत वर्मा जी द्वारा सम्पादित हाइकु का फ़रवरी ,1986 का अंक ।

हिन्दी प्रचारिणी सभा,मार्खम,ओण्टेरियो, कनाडा में 3 दिसम्बर ,11 को श्याम त्रिपाठी मुख्य सम्पादक ‘हिन्दी चेतना’’ के संयोजन में’ विभिन्न विधाओं पर चर्चा की गई । इस कार्यक्रम में रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ ने अन्य विधाओं के साथ  हाइकु तांका, चोका  और माहिया पर सोदाहरण  विशेष चर्चा की , जिसकी विस्तृत रिपोर्ट अगले अंक में दी जाएगी।

डॉ सत्यभूषण वर्मा जी के बार में हाइकु परिवार इतना ही कहना चाहेगा-

1
उनके शब्द
दिल के पन्नों पर
बने सितारे
2
होते हैं ऐसे
कुछ लोग करते
दिलों पे राज
3
आओ करें यूँ
जला हाइकु -दीप
उनको याद

-0-

आशा है हाइकु प्रेमियों को हमारा यह आयोजन पसन्द आएगा। इस वसर पर हम यह कहना चाहेंगे

डॉ हरदीप कौर सन्धु -रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

-0-

04 दिसम्बर : हाइकु दिवसका महत्त्व

– सुधा गुप्ता

हिन्दी काव्यसंसार में हाइकुजैसी लघु कलेवर सुकुमार जापानी विधा का प्रवेश तथा परिचय कराने, हिन्दी कवियों को हाइकुसृजन की प्रेरणा देने वाले शीर्ष विद्वानडॉ0 सत्य भूषण वर्मा का जन्म 04 दिसम्बर 1932 को रावल पिण्डी (अब पाकिस्तान) में हुआ था। डॉ0 वर्मा ने हिन्दी, अंग्रेजी और जापानी भाषा में एम00 की उपाधियाँ प्राप्त कीं। सन् 1954 से अध्यापन कार्य आरम्भ किया। विभिन्न संस्थाओं में कार्य करने के पश्चात् 1974 में जे0 एन0 यू0 दिल्ली के जापानी भाषा के विभागाध्यक्ष (प्रथम भारतीय) का कार्यभार ग्रहण किया और सेवानिवृत्ति के बाद प्रोफ़ेसर एमेरिटस, विजि़टिंग प्रोफ़ेसर आर00पी0 यूनिवर्सिटी, जापान रहे।

आपको हिन्दी, अंग्रेज़ी, उर्दू, बाँग्ला, पंजाबी, चीनी और जापानी भाषा का बहुत अच्छा ज्ञान था। सृजन किया हिन्दी, अंग्रेज़ी और जापानी भाषाओं में। जापानी तांका और हाइकु का हिन्दी में अनुवाद कियासीधे जापानी से, अंग्रेज़ी अनुवाद से नहीं! डॉ0 वर्मा ने अपने शोधकार्य के लिए विषय चुना जापानी हाइकु और आधुनिक हिन्दी कविता; जिसके लिये उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि मिली–(प्रथम संस्करण 1983) हिन्दी काव्य संसार में हाइकु का प्रवेश द्वार इसी शोध ग्रंथ ने खोला। शोध बहुचर्चित रहा। हाइकुसृजन के लिये कवियों की एक टीमतैयार करने का लक्ष्य लेकर आपने 1978 में भारतीय हाइकुक्लबकी स्थापना की और एक अन्तर्देशीय लघु पत्र हाइकुभी निकालना आरम्भ किया ,जिससे दर्जनों हाइकुकार जुड़े। हिन्दी के अतिरिक्त उसमें पंजाबी, मराठी, कन्नड़, गुजराती, नेपाली, मालवी तथा अन्य भाषाओं के हाइकु भी देवनागरी लिपि में, हिन्दी अनुवाद सहित प्रकाशित होते थे।

डॉ0 वर्मा भारत और जापान दोनों देशों में उच्चातिउच्च रूप में समादृत और सम्मानित हुए। भारत और जापान के मध्य साहित्यिकसांस्कृतिक पुल बनाने का महत्त्वपूर्ण कार्य उन्होंने किया। जापान तो मानो उनका दूसरा घर ही था! बीस से अधिक बार जापान की यात्राएँ कीं और वहाँ गोष्ठियों, सम्मेलनों, परिसम्वादों एवं कार्यशालाओं में रूचिपूर्वक भाग लिया। यात्राओं के संस्मरण बड़ी मनोहारी शैली में प्रस्तुत किये। अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के सात मौलिक ग्रन्थों का प्रणयन किया।

डॉ0 वर्मा का सबसे बड़ा प्रदेय यह है कि आप हाइकु की मूल चेतना को समझने और उससे जुड़ने की बात करते थे; हाइकु की प्रथम और अन्तिम शर्त हाइकु में कवित्व का होना मानते थे, सतरह अक्षरी फ़्रेम वर्कमें कुछ भी लिख कर हाइकुनाम दिये जाने से व्यथित हो उठते थे और बारम्बार हाइकु की आत्मा को खोजने की चेष्टा करने के लिये प्रेरित करते थे।

डॉ0 वर्मा के व्यक्तित्व और कृतित्व पर लिखने के लिये एक विशालकाय ग्रंथ भी कदाचित् कम रहेगा ;किन्तु प्रस्तुत प्रसंग में समय और स्थान की सीमा है!

दिनांक 13 जनवरी 2005 को क्रूर काल ने उन्हें हमसे छीन लिया….. उन्हें हाइकु के लिए अभी बहुत कुछ करना शेष था किन्तु यही एक ऐसी स्थिति है जहाँ मानव विवश है, असहाय है!

हिन्दी के हाइकुप्रेमी जगत् ने उनकी जयन्ती 04 दिसम्बर को हाइकु दिवसके रूप में प्रतिवर्ष मनाने का निर्णय लिया। उनके बहुमूल्य अवदान के प्रति कृतज्ञता, आभार और भाव भीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने का इससे अच्छा तरीक़ा और हो भी क्या सकता है? इस अवसर पर सम्पूर्ण हाइकु प्रेमी जगत उन्हें कोटिश: नमन करता है।

हाइकुके विकास हेतु हम सतत प्रयत्नशील रहेंगेंयही हमारा संकल्प हो।

1-डॉ सुधा गुप्ता

1

दिन चढ़ा है

शीत -डरा सूरज

सोया पड़ा है

2

झाँका सूरज

दुबक रज़ाई में

फिर सो गया

3

हरे थे खेत

 पोशाक बदल के

हो गए श्वेत

4

बर्फ़ीली भोर

पाले ने नहलाया

पेड़ काँपते

5

दानी सूरज

सुबह से बाँटता

शॉल- दोशाले

6

पौष की भोर

कोहरा थानेदार

सूर्य फ़रार  

-0-       

2-डॉ अनीता कपूर

1

पहली बार

तुम हो गए सीप

बनी मैं मोती

 2

नाचते रंग

चाहें एक कहानी

इन्द्रधनुषी

3

याद -जुगनू

चिपके हैं दिल से

मत कुरेदो

4

बढ़ाया हाथ

छूने लम्हे को ज़रा

थमी जिंदगी

5

रेतीले लम्हे

बरसात की आस

बरसो मेह

6

धूप टुकड़ा 
बच्चे सा ठिठुरता 
सर्द हवाए

-0-

3-ज्योतिर्मयी  पन्त

1

चन्द्र कमल

बने पराग तारे 

आकाश सर .

2

सागर -सीपी

कुरेद अंतर्मन

भेंट दे मोती.

3

सात फेरों में

बंदिनी सात जन्म

नारी की  कथा .

-0-

4-डा. उमेश महादोषी

1.

मूर्तियां गढ़ो

मत भूलो मगर

कलाकार हो!

2.

आग लगे तो!

लाक्षागृह फुँकेगा

सच जीतेगा!

3.

फूँक से फूटा

कैसा कच्चा घड़ा था!

पत्थर गढ़ा

4

मछली चाहे

बगुले का टेंटुआ

निशाने पर

5

आँखें मूँद लो

निकलने वाला है

राजा यहाँ से!

6

वक्त खोया है

धमाकों में बमों के

तख्त सोया है!

5-सीमा स्मृति

            1

रुरूप अनेक
माँ, बेटी या बहन
संघर्ष जारी
    2
धन पराया
सँवारे घर- द्वार
क्‍यों अत्‍याचार ।
        3
 बेल- सी बढी
 माँ की चिन्‍ता है बनी
दे इसे प्‍यार ।
        4
 अजन्‍मी मिटी
जन्‍मी, घुटती रही
जग-कारा में।

5

सब है मिला

दु:ख उसका भी है

अभिन्न साथी ।

6

सुख– दु:ख हैं

भाव -अनुभूतियॉं

अर्थ अनेक ।

-0-

6-डॉ उर्मिला अग्रवाल

1

धूप सेंकती

गठियाए घुटने

वृद्धा सर्दी में ।

2

कम्पित गात

ठिठुर रहे पात

शीत -निपात ।

3

नाराज़ हुआ

मुँह ढक के बैठा

पौष -सूरज

4

ओसारे बैठी

सिमटी-सिमटी -सी

धूप लजीली

-0-

7- ऋता शेखर ‘मधु’

1

दूर क्षितिज़

झुकता आसमान

धरा के लिए

2

फलों से भरे

वृक्ष हैं झुके खड़े

विनम्र बड़े

3

जाड़े की रात

खुद को पा अकेला

चाँद भी रोया

4

कहे किससे

निज मन की बात

 सिसकी रात

5

लिपटी धुंध

भयावह लगती

जाड़े की रात

6

ठिठुरा तन

एक प्याली चाय से

तृप्त है मन

-0-

8-उर्मि चक्रवर्ती

1

नीले नभ में,
पंछी पंख फैलाए
मन को भाए !
2
सिसकी हवा,
उड़ चल रे पंछी,
नीड़ पराया !
3
आस है मुझे,
पंछी जैसे मैं उड़ूँ
जग में घूमूँ !
4
धरा की धूल,
छूने लगी आकाश,
हवा के साथ !
5
कभी मैं बैठूँ,
गगन को निहारूँ,
ख़ुशी से झूमूँ !
6
ऊषा ने बाँधी,
क्षितिज के हाथों में,
सूर्य की राखी !
-0-

9- त्रिलोक सिंह ठकुरेला

          1

सुवह आई

कलियों  ने खोल दीं

 बंद  पलकें

2

खोल घूँघट

सहसा मुस्करायी

प्रकृति -वधू

3

लुटाने लगे

मतवाले भ्रमर

प्रेम- पयोधि

4

उतरी धूप

 खुशियाँ  बिखराती

खिला आँगन

5

सजने लगे

ऊँची टहनी पर

स्वप्न  अनेक

      -0-

10-सुभाष नीरव

1

आँधियाँ आईं

पर हौसले मेरे

डिगा न पाईं।

2

जब भी बना

एक हिस्सा भीड़ का

मैं, मैं न रहा।

3

मन-इच्छाएँ

उड़तीं पंख फैला

तितलियों-सी।

4

सिर उठाये

बहुत मिले दु:ख

पर्वत जैसे।

5

दरकें रिश्ते

जब बने पर्वत

राई-सी बात।

6

खूब उलीचा

दुख न हुआ कम

समन्दर –सा।

  -0-

11-प्रियंका गुप्ता

1

आकुल मन

भौंरे की गुनगुन

क्यूँ तड़पाए ?

2

पिंजरा तोड़

न जाने किस ओर

लो पंछी उड़ा ।

3

धरा ने ओढ़ी

कोहरे की चादर

अभी सोने दो ।

4

ढीठ कोहरा

सूर्य-दरोगा देख

डर के भागा ।

5

पूस की रात

ग़रीब के पेट में

आग जलती ।

-0-

12-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु

1

सर्दी का चाकू

हड्डियों को चीरता

कटीली धार

2

घास थी सोई

भीगे हैं ओर-छोर

इतना रोई

3

वक़्त की धूल

जो हटी नज़रों से

खिले थे फूल ।

4

वायु अमन्द

बिखरा मकरन्द

रचती छ्न्द

5

जाड़े की धूप

भर-भर के सूप

बाँट रूप

6

ठिठुरे जब

छत पर जा बैठे

बच्चे -सी ऐंठे

-0-

13- नीलू गुप्ता ,कैलिफोर्निया

1
अहंकार से
भली विनम्रता है
जीवन- सत्य
2

विनम्र- घास
आँधी-तूफ़ान आते
झेल ही लेती
पाते ।
-0-

14-डॉ जेन्नी शबनम

1

वक़्त की चोट

बनाती है नासूर

गहरा दर्द !

2

देता है दर्द

बेरहम समय

है मनमानी !

3

खूब नचाता

समय का पहिया

सब लाचार !

4

बंधे हैं पाँव

पुरजोर जकड़

वक़्त की बेड़ी !

5

वक़्त का ज़ख़्म

वक़्त ही भरता है

वक़्त के साथ !

6

आत्मा की पीर

वक़्त का मलहम

जीवन सुखी !

-0-

दस्तावेज़

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Responses

  1. बेहतर…

    दिन चढ़ा है
    शीत -डरा सूरज
    सोया पड़ा है….

    आज के हालातों पर विशेष…

  2. डॉ सत्यभूषण वर्मा जी का जन्म दिन पर ‘हिन्दी हाइकु’ यह विशेष आयोजन बहुत ही महत्वपूर्ण बन गया है। जिन हाइकुओं को इस आयोजन के लिये आपने चुना है, वे भी इसे जानदार बनाते हैं। डा0 सुधा गुप्ता का पहला हाइकु -दिन चढ़ा है/शीत -डरा सूरज/सोया पड़ा है – इसकी बानगी के तौर पर देखा जा सकता है। ‘हिन्दी हाइकु’ जिस पथ पर अग्रसर है, उस पर चलकर आने वाले समय में ‘हाइकु’ और ‘तांका’ का भविष्य और उज्जवल होने वाला है। ऐसा मेरा मानना है। इसके पीछे आप दोनों की लगन और समर्पण बहुत मायने रखता है।

  3. डॉ सत्यभूषण वर्मा जी के जन्मदिवस पर यह हाइकु आयोजन बहुत ही आवश्यक, अनिवार्य, अति सुंदर तथा अद्वितीय है. इससे अपने को जुड़ा हुआ पाकर मै अति सम्मानित महसूस कर रहा हूं.

    उमेश मोहन धवन
    कानपुर

  4. डॉ सुधा गुप्ता के हाइकु में दानी सूरज द्वारा शाल-दुशाले बाँटना ,डॉ अनीता कपूर ्के हाइकु में धूप के टुकड़े का सर्द हवाओं में बच्चे की तरह ठिठुरना बहुत ही जीवन्त चित्रण है । इसतरह के हाइकु इस विधा को नई ऊँचाई प्रदान करेंगे। उर्मि चक्रवर्ती यद्यपि हाइकु में नया नाम है, लेकिन प्रस्तुति की दृष्टि से इनका हाइकु-‘सिसकी हवा,/उड़ चल रे पंछी,/नीड़ पराया।’ में हवा का सिसकना मानवीकरण के साथ हृदय की व्याकुलता को बहुत गहराई उकेरने में सक्षम है। शश्क्त अभिव्यक्ति के बहुत बधाई!

  5. डा. वर्मा के जन्मदिन के उपलक्ष्य में यह लेख बहुत तथ्यपरक और जानकारीपूर्ण है…आभार…।
    साथ में सुन्दर हाइकु तो सोने में सुहागा हैं…।

  6. हाइकु – सागर की गहराई से जो हाइकु मोती चुन कर यहाँ पर पेश किए हैं …सभी हाइकु उम्दा और भावपूर्ण हैं ….यह आयोजन एक महत्व पूर्ण द्सतावेज बन गया है | हिमांशु जी व हरदीप जी की सार्थक सोच और श्रम दोनों ही सराहनीय हैं…..मेरा नमन स्वीकार करें …..सभी रचनाकारों को बधाई व शुभकामनाएं ….

  7. डॉ वर्मा जी के जन्मदिवस पर बहुत ही सुन्दर, महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक लेख प्रस्तुत किया गया है ! बहुत बढ़िया लगा ! हिमांशु जी एवं हरदीप जी ने कठिन परिश्रम किया है और इस कड़ी मेहनत के लिए बहुत बहुत बधाई! महान लेखक एवं कवि के साथ मेरी हाइकु शामिल करने के लिए धन्यवाद! सभी हाइकु शानदार लगा! प्रशंग्सनीय प्रस्तुती!

  8. श्रम का फल
    ये भव्य आयोजन
    बना सफल|

    सजे हाइकु
    स्वीकारें बधाइयाँ
    हाइकुकार|

    सादर
    ऋता

  9. श्रद्धेय डॉ. वर्मा साहब के जन्म दिन पर हिंदी हाइकु के इस आयोजन के लिए हार्दिक बधाई. डॉ. सुधा गुप्ता जी के आलेख में वर्मा साहब का संक्षिप्त जीवन परिचय नए हाइकुकारों की जानकारी बढ़ाएगा. जिसने हाइकु हिंदी के आँगन में हाइकु के पौधे को रोपा, उसके बारे में कम से कम हाइकुकारों को तो जानकारी होनी ही चाहिए! इस आयोजन में अधिकांश रचनाकारों के श्रेष्ठ हाइकु प्रस्तुत करके आपने निसंदेह एक गौरवपूर्ण प्रस्तुति दी है. ‘हिंदी हाइकु’ इसी तरह आगे बढ़ता रहे, अनेकानेकशुभकामनाएं!

  10. आज तो हाइकु संग्रह मिल गया एक साथ इतने सरे सुंदर हाइकु पढने को मिले. भाईसाहब व् हरदीप जी हार्दिक धन्यवाद
    सादर,
    अमिता कौंडल


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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