Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | दिसम्बर 1, 2011

पूर्णता की ओर


     1

 तन की नहीं,

 मन की शक्ति के  ही

 ये हैं पुजारी ।

     2

 दया न माँगे,

सहानुभूति हीं,

 दे दो दुलार ।

      3

मुस्‍कराते वो

ले संघर्षमशाल

मंजिल पार ।

        4

लब खामोश

सफर तन्‍हा सही

जीतेगें जंग ।

      5

नहीं बजती

कानों में कोई धुन

बोलती आँखे ।

       6

 रोशनी दूर

 हौंसले हैं बुंलद

मंजिल पास ।

       7

अस्फुट शब्‍द

कह डालते बात

भावों के भरी

      8

विकट स्थिति

लाघते चले जाते

आशा के संग ।

      9

 संघर्ष ताल

 थामे आशा का हाथ

 थिरकते वो ।

      10

मुस्‍कराहट

समेटे होठों पर,

प्रेरणा स्रोत ।

   11

सोच है ऊँची

पहाड़ों से इरादे

ये बेमिसाल ।

  12

स्‍वीकृति नहीं

समाज की आँखों में,

बाँटते प्‍यार ।

-0-

सीमा ‘स्‍मृति’ 


Responses

  1. लब खामोश
    सफर तन्‍हा सही
    जीतेगें जंग ।

    बहुत खूब…बधाई…।

  2. सीमा जी,आपके सभी हाइकु बहुत ही अच्छे हैं…संघर्ष के लिए प्रेरित करते हुए…

    रोशनी दूर
    हौंसले हैं बुंलद
    मंजिल पास ।

    बहुत-बहुत बधाई!


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