Posted by: हरदीप कौर संधु | अक्टूबर 8, 2011

झील -दर्पण


1
कचरा गिरा
घायल हुई झील
सिमट गई
2
काली हवा ने
जलाये वृक्ष सारे
झील उदास
3
उजड़े तट
न उतरेगा हंस
किनारे सोचें
4
शांत लहर में
गुमसुम था चाँद
तट पे  हम
5
रोई थी झील
फूलों की म्रत्यु पर
जब हँसा वो
6
पका  मौसम
झील की रसोई में
महकी हवा
7
झील किनारे
उतारी ऋतुओं की
डोली प्यारी सी
8
झील -दर्पण

दुनिया  अक्स देख
बहुत  हँसा
9
झील
-आरसी

चटकी,  दुनिया ने
उसमे झाँका
10
वक़्त की गर्द
कुचल गई ,रोया
झील -दर्पण

11
झील की देह
घायल  हुई   राह
पथरीली थी

12
झील में देख
अपना रूप ,तभी
लजाया चाँद
13
तुम जो आये
झील उतरा चाँद
कमल खिले
14
आँसू जो  गिरे
झील का मीठा पानी
खारा होगया
15
तुमने छुआ
शांत झील में उठी
तीव्र लहर

—रचना श्रीवास्तव 


Responses

  1. झील पर एक साथ इतने हाइकु विभिन्नवर्णी , विभिन्न गन्धी । पर्यावरण विनाश के दर्द से लेकर, प्रेम की मधुर अनुभूति तक की यात्रा ! तुम जो आये
    झील उतरा चाँद
    कमल खिले
    XX
    -तुमने छुआ
    शांत झील में उठी
    तीव्र लहर-ये हाइकु तो अपने भावसौन्दर्य में अनूठे हैं, कोमल स्पर्श लिये हुए हार्दिक बधाई!

  2. वाह! सारे हाइकु पढ़कर मजा आ गया| कोई हाइकु किसी से कम नहीं हैं|
    सादर
    ऋता

  3. रचना जी, आपने तो लुप्तप्रायः सी हो रही झील के दर्द को…उससे जुड़ी प्रेम की भावना को जिस खूबसूरती से शब्दों में पिरोया है वह क़ाबिले-तारीफ़ है…।
    मेरी बधाई…।

  4. रचना जी, आपके इन हाइकुओं में पर्यावरण और प्रेम दोनों ही रंग बहुत खूबसूरती से उभरे हैं..कोई किसी से कम नहीं गहराई में …

    आँसू जो गिरे
    झील का मीठा पानी
    खारा होगया

    आंसुओं का खारापन झील के मीठे पानी को खारा कर गया… बहुत ही सुन्दर कल्पना..

    उजड़े तट
    न उतरेगा हंस
    किनारे सोचें

    किनारों की चिंता भी वाज़िब है…

  5. आँसू जो गिरे
    झील का मीठा पानी
    खारा होगया

    वाह क्‍या खूब कहा है। सभी हाइकु बेजोड हैं ।
    सीमा स्‍मृति

  6. vaah rachna ji kya sunder haiku hain ek se badhkar ek. badhai,
    saadar,
    amita kaundal

  7. सभी हाइकु एक से बढ़कर एक आपने में अर्थ समेटे हुए अच्छे लगे| बधाई ………..

  8. aap sabhi ka bhut bahut dhnyavad himanshu ja ka vishesh dhnyavad ki unhone ye haiku mujhse likhvaye
    hardeep ji aapne inko prakashit kiya aapka bahut bahut dhnyavad
    punaha abhar
    rachana

  9. रचना जी ,
    आपने झील पर विविध रंगी बहुत ही सारगर्भित हाइकु लिखे हैं ….कोमल भावनाओं के साथ -साथ उसकी चिंतनीय स्थिति को बखूबी उकेरा है ….बहुत-बहुत बधाई ….


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