Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 30, 2011

धरती झूमे


1

चश्में झरते 

झर-झर करते

मन को भाते

2

बादल आए

झर-झर बरसे

मन को भाए

3

बाग़ में जातीं

तितलियाँ उड़के

रस ले आतीं

4

आम बौराए

शाख़ मे बैठा शुक

शोर मचाए

5

मयूर नाचे

दिखाके करतब

किसको बाँचे

6

कान्हा बुलाए

बजाके मुरलिया

राधा न आए

7

कोयल गाती

कुह-कुह करके

राग सुनाती

8

धरती झूमे

ये बादल झुकके

किसको चूमे

9

सदाएँ आईं

गगन से उतरीं

ज़मीं को भाईं

10

पपीहा बोले

रहे प्यासा फिर भी

चंचु न खोले

–डॉ राज कुमारी शर्मा ‘राज’


Responses

  1. पढ़ा।

  2. राजकुमारी जी प्रकृति के बहुत सुन्दर शब्द चित्र खीचे हैं आपने …..बहुत -बहुत बधाई….


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