Posted by: हरदीप कौर संधु | जुलाई 27, 2011

बरसी रस फुहार


[1]

धरती ने की

बदली से प्रीत, तो

भीगी सरापा

[2]

आई बदली ,

बरसी धरा पर

रस फुहार

[3]

बरखा डोले

घूँघट पट खोले

भीगे जहान

[4]

नाचे मन का

मयूर, छम छम

बरसें मेघा

[5]

फूल पत्ते औ

धरती प्रसन्न हैं

प्यास बुझी जो

[6]

बरखा आई,

छतरी इतराई

जागे जो भाग

– मंजु मिश्रा


Responses

  1. बरखा डोले
    घूँघट पट खोले
    भीगे जहान

    जहान भीगते ही फिर खुशियाँ ही खुशियाँ…
    सभी हाइकु अच्छे लगे..बधाई..

    ऋता

  2. मंजू जी,
    बरखा के बहुत सुन्दर शब्द-चित्र चित्रित किए हैं आपने ….बहुत -बहुत बधाई ….

    -डा. रमा द्विवेदी

  3. वर्षा का बहुत सुन्दर चित्रण | बधाई |
    धन्यवाद |

  4. बरखा डोले
    घूँघट पट खोले
    भीगे जहान

    बहुत अच्छे हाइकु हैं…मेरी बधाई…।

  5. मंजु जी के हाइकु बरसात का मनोरम चित्रण करते हैं । हरदीप का चित्र संयोजन उन्हे और अधिक अर्थवान् बना देता है । आप जैसे रचनाकार हाइकु को शुष्क मरुस्थल से निकालने का काम कर रहे हैं । हार्दिक बधाई !

  6. फूल पत्ते औ
    धरती प्रसन्न हैं
    प्यास बुझी जो
    bhigi bhigi si
    manko bhigoti
    aanandit karti aapke haiku kamal
    chit bhi bahutu sunder lagayenhai aapsabhi ko badhai

    rachana


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