Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जुलाई 4, 2011

वर्ष गाँठ


आज हिन्दी हाइकु अपना एक वर्ष पूरा कर चुका है । हिन्दी -जगत में हिन्दी हाइकु ने जो प्रगति की है , उसमें विश्व भर के हमारे सभी रचनाकार मित्रों , सहृदय प्रशंसकों की महती भूमिका रही है । हम सबके प्रति बहुत आभारी हैं । आशा करते हैं भविष्य में हम सबके सहयोग से और बेहतर कर पाएँगे । हमारा प्रयास रहेगा कि एक वर्ष की अवधि में प्रकाशित चुने हुए हाइकुओं का एक संकलन भी प्रकाशित किया जाए ।

अनेकश: शुभ कामनाओं के साथ

डॉ हरदीप कौर सन्धु -रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

हिन्दी हाइकु (चोका )

 खुली आँख से

देखा एक सपना

हिन्दी हाइकु

जो मंच हो अपना

देश-विदेश

में हो जिसकी  चर्चा

मन ही मन

कुछ ऐसा था सोचा

अकेले चले

थे उस दिन हम

बना कारवाँ

ऐसे ही धीरे-धीरे

प्यार मिला है

ये सबका इतना

होता नभ का

है विस्तार जितना

हाइकु -तरी

सागर था गहरा

नहीं थी डरी

डरती बी भला क्यों

प्रेम से भरी

मिला सबका साथ

रक्षाबन्धन

प्यार से भरे धागे

बहिनें बाँधें

कान्हा भी प्यारा

राम भी दुलारा

दीपक  जले

अँधेरे दूर चले

गुरु-चन्द्रिका

दिप-दिप करती

सब दिलों का

अँधेरा है हरती

सर्दी  आ गई

हमें ठिठुरा गई

मुस्काने लगा

द्वारे आ नया साल

लोहड़ी जली

फिर सर्दी भी टली

वसन्त आया

उपवन सजाया

होली के रंग

पिचकारी में लाया

बैसाखी रंग

मस्त नाचे मलंग

गर्मी  सताए

माँ की पंखी लुभाए

पिता  का प्यार

मरु में जलधार

कभी हाइगा

कभी ताँका  लुभाए

चोका  की धारा

धरती  पर छाए

पीले गुलाब

खुशबू भेंट लाए

बीता यों ही

एक साल लुभाए

लेके फुहारें

वर्षा ॠतु  आ गई

नीले नभ में

घटाएँ  भी छा गईं

लेकर आज

हाथों में हाथ हम

हाइकुकार

मिलाकर कदम

हर दिन यूँ

बढ़ते जा रहे हैं

दिलों में घर

करते जा रहे हैं

सबके साथ

बढ़ रहा कारवाँ

लिए नई तमन्ना !

******

हमारा हिन्दी हाइकु परिवार एक बड़ा परिवार है जिसमें आज की तारीख में लगभग 80 के करीब सदस्य हैं |आज हम सबका एक एक हाइकु यहाँ प्रकाशित कर रहे  हैं और साथ में वह तिथि भी जिस दिन वह हमारे साथ जुड़े।

1.बूढ़े पेड़ से

बाबा की ये झुर्रियाँ

मिलती लगें !

 सुप्रीत सन्धु ( 11/7/10)

2. भूखे है बच्चे

शब्द छोड़ बनाएँ

कापी पे रोटी !

रत्नाकर त्रिपाठी ( 12/7/10)

3.देह खोजता

तज  मन- कस्तूरी

मै था पागल  .

मंजु मिश्रा ( 15/7/10)

4. तपे धरती

जन-मन व्याकुल

कर बरखा !

ओम पुरोहित ‘कागद’( 15/7/10)

5. हुई बरखा

जल-‍‌थल जो हुआ

ये मन प्यासा !

डॉ. टी.  एस. दराल ( 16/7/10)

6.कोयल कूके

नाचे मोर मगन

आया सावन

देवेन्द्र पाण्डेय ( 19/7/10)

7. हवा जो आई

परदेसी लौट आ

संदेशा लाई ।

डॉ भावना कुँअर ( 24/7/10)

8.बच्चा जो  हँसा

एक सपना टूटा

अहं भी छूटा

 मनोज भारती(26/7/10)

9.हमारा गाँव

न जहाँ एक नदी

न कोई नाव

डॉ. सतीशराज पुष्करणा ( 30/7/10)

10. बादल फटा

 हुआ ऐसा विनाश

जीवन घटा

सुमित प्रताप सिंह ( 4/8/10)

11 .लिखा  जो शब्द
तेरे नाम से जुड़ा
रुकी कलम!

डॉ सन्दीप चौहान ( 9/8/10)

12. जनाबे आली
राजनीति में गाली
ईमानदारी

डॉ. डंडा लखनवी ( 9/8/10)

13.फूलों -सा मन

कैसे पार करूँ मैं

काँटों का वन

डॉ विद्या बिन्दु सिंह (13/8/10)

14.पगली हवा

बतियाते न थकी

सो गए पेड़

डॉ शैल रस्तोगी ( 14/8/10)

15. लिक्खे सर्वत्र

आँसुओं की बूँदों से

पेड़ों ने पत्र

कुँवर बेचैन( 14/8/10)

16. माँ का आँचल

शीतल -सुरभित

मलयानिल!

डॉ मिथिलेश दीक्षित ( 16/8/10)

17. आँसू तुम्हारे

गिरे मेरी आँखों से

मिटे हैं गिले ।

सुदर्शन रत्नाकर ( 23/8/10)

18. डूबे मगर

 उछली फिर  भी

मन-तरंग

उमेश महादोषी ( 30/8/10)

19.अलसाई भोर

आतिशी दोपहर

 साँझ निर्झर।

कमला निखुर्पा (1/9/10)

20.सरसों फूले 

महुआ गिरे बाग
बसंत आया 
रचना श्रीवास्तव ( 4/9/10)

21. जीवनगीत

निरर्थक सपने

देखे हमने।                                                                                   नवीन चतुर्वेदी( 5/9/10)

22 .बड़े सवेरे

उठ जातीं चिड़ियाँ

जगाता कौन।

डॉ रमाकान्त श्रीवास्तव( 8/9/10)

23. घुटनों पर

चलता नन्हा बच्चा

जैसे ख़ुदा हो ।

प्रियंका गुप्ता(16.9/10)

 24.कैसा जीवन

 साँसें ढो जीना पर  कितने दिन!

उमेश मोहन धवन( 19/9/10)

25. दिन बदले

अगम भरा ताल

लौटे मराल ।

डॉ सतीश दुबे( 24/9/10)

26. धूप जल में

आँखे मूँद नहाते

ठिठुरे पंछी !  

डॉ. सुधा गुप्ता ( 30/9/10)

 

27.वैरागी मन

 उसे देख बौराया
 साधना टूटी
 डॉ उर्मिला अग्रवाल ( 7/10/10)

28.सुखद होती

तुतलाती दुनिया

सदा बच्चों की ।

डॉ. सुरेश उजाला( 15/10/10)

29.मिट्टी के नहीं

ज्ञान के दीप जला

दिवाली मना ।

 डॉ मिथिलेशकुमारी मिश्र ( 4/11/10)

30.बेटी, दीपक

जलता पल-पल

कैसा निर्मल ।

हारून  रशीद ‘अश्क’( 4/11/10)

31.दीप -पर्व है

हर वर्ग में आज

उल्लास छाया ।

पुष्पा जमुआर ( 5/11/10)

32.जलाओ दीये

अँधेरों को भगाओ

अपने लिए ।

रामनारायण ‘रमण’( 5/11/10)

33.दीपक बुझे
रे मानव तन के
ये  दिवाली है !

सुनील गज्जानी ( 5/11/10)

34.अपने रूठे

अपनों से ही सारे

बन्धन झूठे ।

डॉ राज कुमारी शर्मा ‘राज़’(15/11/10)

35. अंत नहीं ये

जब तक साँस है

वही आस है ।

 लावण्या ( 25/11/10)

36.तुम दीपक

मै बाती हूँ तुम्हारी

जलेंगे संग।

 निर्मला कपिला ( 25/11/10)

37.आप आए तो
जल उठा दीपक
मन का मेरे ।

गिरीश पंकज ( 7/12/10)

38.मानवता का

महके गुलशन

वे सुमन हों

देवी नागरानी ( 16/12/10)

39.सुराही आज

बैठी है उदास -सी

होकर प्यासी ।

मुमताज़ व टी एच खान(18/12/10)

40.वैरागी मन

उसे देख बौराया

साधना टूटी

डॉ उर्मिला अग्रवाल( 23/12/10)

41.गिरते शोले

लू के थपेड़ों से

सहमे पेड़!

राजेन्द्र मोहन त्रिवेदी ‘बन्धु’(9/1/11)

42.कितना लूटा

धन संपदा यश

घर न मिला !

डॉ ॠतु पल्लवी ( 20/1/11)

43.उड़ो परिन्दो !

चीर कर रख दो

आसमान को !

अंशु सिंह (31/1/11)

44.मैं कुछ नहीं

मेरा कुछ भी नहीं

बस तू ही तू !

दिलबाग  विर्क ( 13/2/11)

45.आज भी कुछ

दीवारें नम -सी हैं

कौन रोया था ?

डॉ रागिनी प्रताप(15/2/11)

46.माँ की दुआ से
पूरन हर काम
मेरा विश्वास ।

डॉ  रमा द्विवेदी(28/2/11)

47.बोझिल मन

रिश्ते टूटते जैसे

काँच-बर्तन

डॉ पूनम मित्तल(28/2/11)

48.पंख पसारे

हरा-भरा शज़र

तितली -संग!

डॉ अरुणा दुबलिश(28/2/11)

49.मन उदास
घर आँगन सूना 
बची है आस!

रेखा राजवंशी (3/3/11)

50.मन की पीर

बहती है नैनों से

बनके नीर

मीनाक्षी जिजीविषा(3/3/11)

51.मीठी -सी धारा

सागर अंक भर

करता खारा

अमर साहनी(5/3/11)

52.दे ज़्यादा दर्द

वही तो कहलाता

है हमदर्द

कमल कपूर(5/3/11)

53.चाँदनी रात

चन्द्रमा करे बात

भीगते गात

एन एल गोसाईं(16/3/11)

54.प्रकृति सजी

हवाएँ झूम उठी

बाँसुरी बजी

डॉ गोपाल बाबू शर्मा (16/3/11)

55.मधु ॠतु में

यौवन इठलाता

सपने जगाता

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’(16/3/11)

56.पानी बरसा

देह बनी धरती

मन भी भीगा।

सुभाष नीरव(31/3/11)

57.जायेगी कहाँ 
चहकती चिड़िया
उजड़ा बाग़!

डॉ   जेन्नी  शबनम(31/3/11)

58.मिट्टी के रंग

चढ़ते हैं रोज़ ही

आदमी संग।

सुरेश यादव (4/4/11)

59.ख़ुद को सोचूँ
और तुमको पाऊँ
यही प्यार है.

संकल्प शर्मा(7/4/11)

60.क्या है फैशन !

न्यूनतम वस्त्रों में

देह -दर्शन।

लक्ष्मीशंकर वाजपेयी(11/4/11)

61.बिखर गया

जीवन की साँझ में

उदास फूल।

ममता किरण( 11/4/11)

62.उम्र बितादी

समझ ही न पाए

समझदारी

डॉ सुरेन्द्र वर्मा (15/4/11)

63.बीत गया जो

करो न याद उसे

आज में जियो

पुष्पा रघु (18/4/11)

64.तुम्हारा नाम

हृदय पर लिखा

जीवन रँगा

रेखा रोहतगी(24/4/11)

65.चंद्रमा  ढला 
भोर हुई  सुहानी 
तुम न आए

डॉ अमिता कौण्डल(1/5/11)

66.माँ का आँचल

शीतल -सुरभित

मलयानिल!

कृष्ण कुमार यादव(1/5/11)

67.माँ धूप छाया
माँ शीतल बयार
देती ठंडक!

नीलू गुप्ता (8/5/11)

68.चाहेगा ख़ुदा

कब हमें देखना

यूँ ज़ुदा-ज़ुदा

डॉ पुरुषोत्तन दुबे(22/5/11)

69.छाते ही घटा

विरह से विदग्ध

हृदय फटा

केशव शरण (22/5/11)

70.तुम गए हो

सब अपरिचित

कर गए हो

डॉ बाल कृष्ण पाण्डेय (22/5/11)

71.सूरज उगा

तम ने आँखें मूँदी

भोर हो गई

प्रताप सिंह सोढ़ी (22/5/11)

72.कवि -कल्पना

 सूरज की किरण

   रची कृतियाँ

नागेश भोजने(26/5/11)

73.मीठे हैं बोल

मिसरी रहे घोल

मन अमोल

मीरा ठाकुर(26/5/11)

74.दिन निकला

चल पड़ा पथिक

रुकना मत

स्वरूप राय(26/5/11)

75.मैं हँसती हूँ

एक विरोध मेरा

इसी रूप में

डॉ नूतन डिमरी गैरोला(24/6/11)

76.आग बरसे

जंगल में सन्नाटा

झिंगुर गाए

ललित मावर(24/6/11)

77.तूने छूकर

मुझको महकाया

दिल खिलाया

जया नर्गिस (30/6/11)

78.बारिश रुकी

पत्तों ने टपकाए

बूँद के मोती

ॠता शेखर मधु‘(30/6/11)

79.मैं नहीं हारा

है साथ न सूरज

चाँद न तारा ।

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’(सम्पादक)

80.हिम्मत जुटा

मिलेगी वो मंजिल

मन चाहे जो !

डॉ हरदीप कौर सन्धु(सम्पादक)

*******

 

 


 



 


 

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Responses

  1. ये ऐसे बढ़ता रहा तो हिन्दी हाइकु को उपेक्षित नहीं कर सकेंगे साहित्य के इतिहासकार और विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम बनानेवाले।

  2. ‘हिन्दी हाइकु’ के एक वर्ष पूरा होने पर आपको बहुत बहुत बधाई। ‘हाइकु परिवार’ में इसी प्रकार अच्छे रचनाकारों का शामिल होना जारी रहे, यही मेरी कामना है…

  3. हिन्दी हाइकू के एक वर्ष पूरा होने पर हार्दिक बधाई। इस एक वर्ष में आप दोनों ने जिस समर्पण भाव से श्रम किया है, उसे नमन! आपका श्रम सार्थक भी हुआ है। काफी सारे लोग हिन्दी हाइकू से तो जुड़े ही, कई लोगों ने तो पहली बार हाइकू लिखे और बेहतरीन हाइकू लिखे। कुछ मित्र हाइकू को पढ़ते ही नहीं थे, पर आपके प्रयासों से वे आज हाइकु को पसन्द करने लगे हैं। यह बड़ी बात है। हमारी शुभकामना है आप इस पथ पर निरन्तर आगे बढ़ते रहें!

  4. kitna sunder ki man moh liya is chonka ne .aap dono ki mehnat rang rahi hai .aaj kitne log apke parivar ke sadasya hai..
    aap dono ke liye bahut shubhkamnaye sada aese hi margdarshan karte rahiye.
    saader
    rachana

  5. चंदन कुमार जी , सुभाष जी , उमेश जी और रचना जी ,
    आप सबका हम ह्र्दय से धन्यवाद करते है !
    @ चंदन कुमार जी और सुभाष जी …..आपके मुंह में धी-शक्कर ( यह पंजाबी की कहावत है …अगर कोई शुभ कार्य की दुआ करे उसके लिये ऐसा कहा जाता है )
    @ उमेश जी …आपने ठीक कहा है कि हमारा श्रम सार्थक रहा …इस श्रम में आप भी शामिल हो |
    @रचना जी यह हमारा…आपका ..हम सबका परिवार है | हम सभी ने मिलकर काम किया है और इस को कामयाब बनाया !

  6. Sabse pahle to aap dono ko bahut saari shubkamnayen 1 varsh pura hone par,Ab aati hai haiku ki baat to aap dono ne ye eak aisa manch banaya jahna sahi mayno men haiku padhne ko mile,haiku ke name par likhi jane vaali 3 panktiyon ko padhkar jahana man dukhi hota tha vahi is manch par manje huye haiku padhne ko mile,fir aapka naye logon ko jodne ka pryas sarahniy hai,fir haikuon ko sajakar dena jo unmen ek nayi jaan daal deta hai…bas ye silsila yun hi chlata rahe yahi hamari dua hai…

  7. हाइकु सालगिरह पर बधाई
    १ .बीजारोपण/पल्लवित हाइकु,/सालगिरह
    २ .सतरंगिया / खिलीं यूँ पंखुरियाँ सुरभि छाई
    ३ .अम्बुआ डार/ पिक कुहुक उठी / सालगिरह
    ४ . .हर्षातिरेक / मन मयूर नाचा / भरी उमंग
    ५ . .तार झंकृत / मन -वीणा मधुर / गुंजार उठी
    ६ . शुभ बधाई / वर्षगाँठ उत्सव / दुन्दुभि बजी
    नीलू गुप्ता

  8. समस्त हिंदी हाइकू परिवार को बहुत बहुत बधाई. यह तो आदरणीय रामेश्वर जी एवं हरदीप जी के अथक और सार्थक प्रयासों का सुफल है कि आज मुझ जैसे न जाने कितने लोग हाइकू की विधा से परिचित हो सके हैं. इतने बड़े साहित्यिक परिवार का हिस्सा बनकर मै ख़ुद को धन्य समझती हूँ. ईश्वर से प्रार्थना है यह परिवार यूँ ही बढ़ता रहे और हिंदी साहित्य के क्षेत्र में अपना नाम रोशन करता रहे.

    सादर

    मंजु

  9. aadarniy kamboj ji evam hardeep ji
    aapke haiku sagar mein ek se ek
    chamkile moti dekhne ko mile
    in motion ko aapne saja kar pesh kiya hai
    HAPPY B’DAY HINDI HAIKU

  10. hindi haiku ke ek saal poora hone par bahut-bahut badhayi…main apne aap ko bahut saubhagyashali manti hoon ki is parivaar se judi…ye parivaar din dooni raat chauguni ho, yahi dua hai…

  11. आदरणीय हिमांशु सर एवं हरदीप जी,
    आपके द्वारा रचित चोका में आपकी एक
    वर्ष की मेहनत साफ़ झलक रही है.
    मैं बेहद प्रसन्न हूँ कि आपके सहयोग से
    हिन्दी हाइकु के प्रथम वर्षगांठ पर मैं भी
    इस परिवार के सदस्य के रुप में शामिल हूँ.
    धन्यवाद,हार्दिक बधाई एवं
    ढेर सारी शुभकामनाऔं के साथ,

    ऋता शेखर ‘मधु’

  12. यी आपका और हिमांशु भाई का प्रयास रंग लाया। हाइकु विधा से परिचय भी भाई हिमांशु जी के माध्यम से हुया। अब तो 150 से ऊपर हाइकु रच दिये। हिन्दी हाइकु की वर्षगाँठ पर हार्दिक बधाई और शुभकामनायें। ये सफर अनवरत चलता रहे।

  13. आदरणीया भाई साहब और हरदीप जी !
    सबसे पहले हिन्दी हाइकु की प्रथम वर्षगाँठ पर हार्दिक बधाई !
    आप लोगों के परिश्रम सेहिन्दी हाइकु ने साहित्य -जगत् में एक अलग ही छाप छोड़ी है और दिन पर दिन हिन्दी हाइक्य का परिवार बढ़ता ही जा रहा है । हमें भी इस परिवार का हिस्सा बनाने पर हम आपके बहुत आभारी हैं , हमारी यही दुआ है कि यह परिवार सफलतापूर्वक आगे बढ़ता रहे और हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में नित्य नई ऊँचाइयाँ छूता रहे । धन्यवाद !

  14. आदरणीय हिमांशुजी एवं हरदीप जी,
    इस सफल प्रयास को अंजाम देने के लिए आप दोनों को इस वर्षगाठ पर ढेरों बधाई व् शुभकामनाएं
    इस दिशा में यह एक प्रेरणादायक कदम है कि हम अपने मनोभावों को अभिव्यक्त कर पाते है.
    देवी नागरानी

  15. डा. हरदीप जी व हिमांशु जी,
    आप दोनों का समन्वित प्रयास बहुत सार्थक और सराहनीय रहा ….इसलिए प्रथम वर्षगाँठ के शुभ अवसर पर सबसे अधिक बधाई और शुभकामनाए‘ं आप दोनों स्वीकार करियेगा । उन सभी रचनाकारों को भी अनेकानेक शुभकामनाएँ जो इस हाइकु परिवार से जुड़े हैं। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि यह हाइकु परिवार यूँ ही पल्लवित ,पुष्पित और फलित हो …इन्हीं हार्दिक मंगलकामनाओं सहित…..

  16. Hardeep ji aur Kamboj ji ke sammilit prayaason se aaj haaiku naye kirtimaan sthaapit kar raha hai. haaiku se mera parichay bhi adarniy Kamboj ji ne hin karaya aur unki prerna se main likh paai. haaiku pariwaar ke samast sadsyon ka abhinandan aur badhai. post to dekh chuki thee lekin kai baar waqt par kuchh likhna mushkil hota hai tab tak der ho chuki hoti hai, fir bhi mera manana hai ki itni bhi der nahin ki hum baad mein badhai na de sakein. sabhi ko shubhkaamnaayen.


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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